Important :
स्वच्छता, समयपालन और यात्री सुविधा को अपना ध्येय बनाएं रेलकर्मी    ||    बरवाला-धांसू स्टेशन के बीच हुई रेल दुर्घटना की जांच शुरू    ||    रेलवे में फिजूल खर्ची रोकने और वास्तविक सुधार किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव    ||    आरपीएफ के उच्च पदों पर हुई अदला-बदली    ||    पपिया लाहिड़ी के जाने से कटा द.पू.रे. के अधिकारियों/कर्मचारियों का पाप    ||    तीव्र ढ़ांचागत विकास हेतु सभी संभावित स्रोतों से निवेश लाने की जरुरत है -सुरेश प्रभु    ||    रेलवे में समाप्त होनी चाहिए अंग्रेजों की बंगला प्यून की कुप्रथा    ||    रेल परिसर में राजीव गांधी के नाम पर कथित मेले के आयोजन से करोड़ों का घोटाला    ||    फिरोजपुर मंडल, उत्तर रेलवे के पांच अधिकारियों के घरों पर सीबीआई का छापा    ||    रेलवे में एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं !    ||    मध्य रेलवे को लगी मानवीय पनौती    ||    सेवा के अंतिम दिन किसी महाप्रबंधक द्वारा कोई निर्णय क्यों लिए जाने चाहिए?    ||    हावड़ा-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस में एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. की अवैध यात्रा?    ||    ‘सीट्रैम’ का वार्षिक समारोह 19 जनवरी को सिकंदराबाद में    ||    रेल की सुरक्षा पर रेल मंत्रालय की जो भी संस्तुति होगी, गृह मंत्रालय उसको अक्षरशः स्वीकार करेगा -राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री    ||    यात्री सुविधा के कार्यों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए -राजीव मिश्र    ||    क्या भारतीय रेल अरुणेंद्र कुमार और उनकी बीवी की जागीर है?    ||    मेंबर ट्रैफिक किसको बनाया जाए, इस पर अभी-भी पेंच कायम    ||    हेमंत कुमार को रेलवे बोर्ड का नया मेंबर मैकेनिकल बनाया गया    ||    आईआरसीटीसी ने जारी किया अपना ऑफिशियल ऐप

Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact:+919869256875 Email : editor@railsamachar.com, railwaysamachar@gmail.com

रेलवे में फिजूल खर्ची रोकने और वास्तविक सुधार किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव    ||    आरपीएफ के उच्च पदों पर हुई अदला-बदली    ||    पपिया लाहिड़ी के जाने से कटा द.पू.रे. के अधिकारियों/कर्मचारियों का पाप    ||    तीव्र ढ़ांचागत विकास हेतु सभी संभावित स्रोतों से निवेश लाने की जरुरत है -सुरेश प्रभु    ||    रेलवे में समाप्त होनी चाहिए अंग्रेजों की बंगला प्यून की कुप्रथा    ||    रेल परिसर में राजीव गांधी के नाम पर कथित मेले के आयोजन से करोड़ों का घोटाला    ||    फिरोजपुर मंडल, उत्तर रेलवे के पांच अधिकारियों के घरों पर सीबीआई का छापा    ||    रेलवे में एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं !    ||    मध्य रेलवे को लगी मानवीय पनौती    ||    रेलवे बोर्ड को अपना आदेश लागू करवाने की कोई चिंता नहीं !    ||    हावड़ा-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस में एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. की अवैध यात्रा?    ||    ‘सीट्रैम’ का वार्षिक समारोह 19 जनवरी को सिकंदराबाद में    ||    रेल की सुरक्षा पर रेल मंत्रालय की जो भी संस्तुति होगी, गृह मंत्रालय उसको अक्षरशः स्वीकार करेगा -राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री    ||    यात्री सुविधा के कार्यों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए -राजीव मिश्र    ||    क्या भारतीय रेल अरुणेंद्र कुमार और उनकी बीवी की जागीर है?    ||    मेंबर ट्रैफिक किसको बनाया जाए, इस पर अभी-भी पेंच कायम    ||    हेमंत कुमार को रेलवे बोर्ड का नया मेंबर मैकेनिकल बनाया गया    ||    आईआरसीटीसी ने जारी किया अपना ऑफिशियल ऐप    ||    उत्तर रेलवे पर क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक संपन्न    ||    Must do's to improve the Indian Railways

Headlines :
स्वच्छता, समयपालन और यात्री सुविधा को अपना ध्येय बनाएं रेलकर्मी

गणतंत्र दिवस पर महाप्रबंधक/पू.रे. आर. के. गुप्ता का रेलकर्मियों को संदेश

66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को पूर्व रेलवे स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, जेम्स लॉन्ग सरणी, बेहाला, कोलकाता में ध्वजारोहण और राष्ट्रध्वज को सलामी देने के पश्चात् बड़ी संख्या में उपस्थित रेलकर्मियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक आर. के. गुप्ता ने कहा कि वे स्वच्छता, समयपालन और यात्री सुविधा को अपनी ड्यूटी का प्रमुख ध्येय बनाएं. इस अवसर पर श्री गुप्ता ने आरपीएफ की महिला सिपाहियों की गारद का निरीक्षण करते हुए उसकी सलामी भी ली.


इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित रेलकर्मियों एवं उनके पारिवारिक सदस्यों को संबोधित करते हुए महाप्रबंधक श्री गुप्ता ने कहा कि चालू वित्तवर्ष के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के मध्य पूर्व रेलवे ने माल परिवहन आय से 3863 करोड़ रुपए हासिल किए हैं, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि के 3257 करोड़ रुपए से काफी अधिक है. उन्होंने कहा कि इस दरम्यान पूर्व रेलवे ने 13.11 प्रतिशत अधिक, 87 करोड़ यात्रियों का परिवहन करके कुल 1717 करोड़ रुपए की यात्री आय अर्जित की है.

श्री गुप्ता ने इस मौके पर पूर्व रेलवे द्वारा ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के अंतर्गत चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूर्व रेलवे के सभी रेलवे स्टेशनों, कार्यालयों और रेल परिसरों में इस साफ-सफाई अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि समयपालन पूर्व रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से पूर्व रेलवे ने समयपालन में मेल/एक्स. में 20 प्रतिशत और यात्री गाड़ियों में 28 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है.

बरवाला-धांसू स्टेशन के बीच हुई रेल दुर्घटना की जांच शुरू

उत्तर रेलवे, अम्बाला मंडल के अंतर्गत हिसार जिले में जाखल-हिसार खंड के बरवाला-धांसू स्टेशनों के बीच मानवरहित समपार संख्या-43 पर 26 जनवरी की सुबह हुई भीषण रेल दुर्घटना की जांच शुरू कर दी गई है. मंडल रेल प्रबंधक, अम्बाला ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. घटना की जानकारी मिलते ही उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक ए. के. पुठिया अपने सभी सम्बंधित विभाग प्रमुखों के साथ दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर देखा तो वहां तमाम संरक्षा प्रबंधों को दुरुस्त पाया. रेल मंत्रालय सहित महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे श्री पुठिया और उनके सभी विभाग प्रमुखों ने इस दुर्घटना में मारे गए सभी लोगों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की है. महाप्रबंधक ने दुर्घटना में घायल हुए लोगों को हिसार के सर्वोदय एवं सिविल हॉस्पिटल में जाकर देखा और उनके इलाज का उचित निर्देश भी दिया.

इस भीषण दुर्घटना में कुल 12 यात्रियों के मारे जाने और 3 यात्रियों के घायल होने की खबर है. यह घटना गाड़ी संख्या 54632 से टाटा मैजिक नंबर एचआर-39बी/9529 के टकरा जाने से हुई है. प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार उक्त रेलगाड़ी का ड्राइवर उक्त मानवरहित समपार से पहले लगातार हॉर्न बजा रहा था, क्योंकि टाटा मैजिक समपार पर कुछ खराबी के चलते अटकी हुई थी. गाड़ी के नजदीक आने पर टाटा मैजिक स्टार्ट होकर चलने ही लगी थी कि ट्रेन ने उससे टकरा गई. इस दुर्घटना में टाटा मैजिक करीब 190 मीटर तक घिसटतीचली गई थी. उल्लेखनीय है कि सड़क वाहन कानून 1988 और रेलवे कानून की धारा 161 के अनुसार सड़क उपयोगकर्ताओं को रेल समपार पर होने वाली दुर्घटना के लिए जिम्मेदार माना गया है, क्योंकि समपार से पर्याप्त दूरी पर अपने वाहन को रोकना उनकी जिम्मेदारी है.

रेलवे में फिजूल खर्ची रोकने और वास्तविक सुधार किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव

उपमुख्य अभियंता-1 एवं 2 जैसे फालतू पदों को मर्ज किया जाना चाहिए
अनावश्यक सीएओ/नार्थ एवं
सीएओ/साऊथ जैसे पदों का कोई औचित्य नहीं है
बिना किसी तकनीकी डिग्री/डिप्लोमा वाले पीडब्ल्यूएस को एसएसई बनाए जाने और उनके पद खत्म किए जाने के औचित्य की पुनर्समीक्षा की जाए

1. किसी भी अवस्था में एक पद पर पांच साल से कम सेवा अवधि पूरा हुए बिना किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की अगले पद पर पदोन्नति नहीं होनी चाहिए. यदि पद रिक्त है, तो उस पद की योग्यता के अनुरूप क्वालीफाइड एवं योग्य व्यक्ति/कर्मचारी को आरआरबी के अधीन चयन कर उक्त पद को भरा जाए. वर्तमान में बिना किसी तकनीकी योग्यता और पांच साल के कार्य अनुभव के ही पिछली तारीख (बैक डेट) से जूनियर इंजीनियर मानते हुए सभी रेलपथ पर्यवेक्षकों (पीडब्ल्यूएस) को सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) बना दिया गया है और उक्त पद पर कार्य किए बिना ही उक्त अवधि के वेतन एरियर का भी भुगतान करके देश का और रेलवे का भारी आर्थिक नुकशान भी किया गया है. रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या पीसी-III/2013/सीआरसी/4, दि. 8.10.2013 एवं पत्र संख्या पीसी-III/2013/सीपीसी/4, दि. 8.10.2013 के तहत सभी पर्यवेक्षकों को 01.11.2013 की तारीख से एसएसई में सीधी पदोन्नति दे दी गई है. रेलवे ट्रेक के दैनिक रख-रखाव हेतु रेल पथ पर्यवेक्षक का पद अत्यंत आवश्यक था, लेकिन फंड को जस्टिफाइड करने के लिए यह गलत फैसला लिया गया. इसके बदले कार्यालय क्लर्क और बंगला प्यून तथा आवश्यकता से अधिक हो चुके रेल अधिकारियों के पदों को सरेंडर किया जाना चाहिए था. इस पूरे मामले की पुनर्समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है.

2. किसी भी निर्माण कार्य की डिजाइन और एस्टीमेट बनाने के लिए सम्बंधित रेल अधिकारी को ही बाध्य किया जाना चाहिए, क्योंकि ये इसका काम बाहरी एजेंसी को देने के लिए पहले से ही इसमें अपने मन-मुताबिक करीब 40% का हेर-फेर तय कर लेते हैं. यदि कोई प्राइवेट एजेंसी इसमें अपनी ईमानदारी दिखाती है, तो उसे बदल दिया जाता है और दूसरी एजेंसी को हायर कर लिया जाता है. फिर भी यदि ऐसा किया जाना आवश्यक है, तो इसे भी बड़े पैमाने पर ओपन टेंडर के तहत ही स्वीकार किया जाना चाहिए. तथापि इसके सत्यापन की जिम्मेदारी सम्बंधित रेल अधिकारी पर दंड के प्रावधान के साथ होनी चाहिए.

3. निर्माण प्रोजेक्ट में उपमुख्य अभियंता (डिप्टी सीई) और मुख्य अभियंता (सीई) के पद तथा ऐसे सभी विभागीय पदों को औचित्यपूर्ण कार्य के अनुरूप मर्ज कर दिया जाना चाहिए. बिना काम के प्रतिमाह दो कार्यालय खोलकर रखने से रेलवे को करोड़ों रुपए का नुकशान हो रहा है. उपमुख्य अभियंता-1 एवं 2 को भी आपस में मर्ज कर दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही विभिन्न रेलों में चल रहे सीएओ/नार्थ एवं सीएओ/साऊथ जैसे पदों को भी आपस में मर्ज किया जा सकता है, क्योंकि किसी भी रेलवे में ऐसे दो पदों के अनुरूप पर्याप्त काम नहीं है.

आरपीएफ के उच्च पदों पर हुई अदला-बदली

यू. एस. शुक्ला का ट्रांसफर आदेश बदले जाने पर उठ रहे हैं सवाल
महिम स्वामी की ओपन लाइन पोस्टिंग की सीबीआई से मिली क्लीन चिट!

आरपीएफ के जोनल स्तर के सात उच्च पदों पर अदला-बदली की गई. 16 जनवरी को रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश के अनुसार दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त (सीएससी) पी. के. अग्रवाल को एस. के. परही की जगह सीएससी/कोर/इलाहाबाद की पोस्ट पर और एस. के. परही को सीएससी, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर की खाली पोस्ट पर भेजा गया है. जबकि श्री अग्रवाल की जगह दक्षिण पूर्व रेलवे की सीएससी पोस्ट पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीएससी एस. के. सिन्हा की पोस्टिंग की गई है. द.पू.म.रे. में बतौर डीआईजी कार्यरत मुनव्वर खुर्शीद अब इसके साथ ही सीएससी का भी अतिरिक्त चार्ज संभालेंगे.

इस पोस्टिंग ऑर्डर में सबसे बड़ी विसंगति यह है कि मध्य रेलवे के एडिशनल सीएससी यू. एस. शुक्ला की बतौर सीएससी प्रमोशनल पोस्टिंग पहले पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर के लिए की गई थी, जिसे बदलकर अब पश्चिम रेलवे में कर दिया गया है. जबकि अब तक सीएससी/प.रे. का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे डीआईजी डी. बी. कासार को वहीं डीआईजी एवं एडिशनल सीएससी ही रहने दिया गया है. श्री शुक्ला का यह पोस्टिंग ऑर्डर क्यों बदला गया, यह किसी की समझ में नहीं आया है, क्योंकि श्री शुक्ला काफी लम्बे समय से मुंबई में ही पदस्थ हैं. इससे पहले वह पश्चिम रेलवे में ही पदस्थ थे.

पपिया लाहिड़ी के जाने से कटा द.पू.रे. के अधिकारियों/कर्मचारियों का पाप

भारतीय रेल में पिछले करीब पन्द्रह दिनों में हुए दर्जनों तबादले
ज्यादातर अधिकारियों को जहां की तहां दी गई पोस्टिंग
अधिकारियों का पद जरुर बदला, मगर शहर नहीं बदला गया
रेलवे बोर्ड की इसी भ्रष्ट नीति के कारण हुआ है भारतीय रेल का बंटाधार

इंडियन रेलवे एकाउंट्स सर्विस की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती पपिया लाहिड़ी के ट्रांसफर से दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों का लगभग 10 साल से चला आ रहा ‘पाप’ कट गया है. श्रीमती लाहिड़ी को अब कोलकाता में ही पूर्व रेलवे में एफए एंड सीएओ बना दिया गया है. दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है की वास्तव में यह उनका कोई न कोई पाप ही था, जो कि पपिया लाहिड़ी दक्षिण पूर्व रेलवे में करीब 10 साल तक लगातार वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी (एसडीजीएम/सीवीओ) के पद जमीं रहीं.

तथापि वर्ष 2008 से 2011 के बीच आयरन ओर की ढुलाई मामले में हुए भयानक भ्रष्टाचार और महाघोटाले को न तो वह अंजाम तक पहुंचा पाईं और न ही किसी कंपनी से रेलवे द्वारा इसके मालभाड़े का अंतर आज तक वसूला जा सका है. जबकि बताते हैं कि ऐसी करीब 18 से 20 कंपनियों की शार्ट लिस्टिंग की गई थी, जिन्होंने घरेलू दरों पर आयरन ओर की ढुलाई करके उसका निर्यात कर दिया था, जो कि एक भारी भ्रष्टाचार था और इससे रेलवे को हजारों करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ था. इसमें से सिर्फ एक कंपनी पर माल भाड़े का यह अंतर खुद रेलवे ने ही करीब 800 करोड़ का निकाला था. यह मामला अभी तक अदालत में विचाराधीन है. श्रीमती लाहिड़ी का यह ट्रांसफर आदेश रेलवे बोर्ड से 16 जनवरी को जारी किया गया था.

रिंकेश राय, सीएफटीएम/पू.त.रे. को प्रतिनियुक्ति पर जीएम/ऑपरेशंस/क्रिस/दिल्ली में पदस्थ किया गया है. 23 जनवरी को जारी आदेश में रेलवे बोर्ड ने उनके साथ ही उदय वी. बोभाटे, डिप्टी सीओएम/कोचिंग/म.रे. मुंबई सीएसटी को भी प्रतिनियुक्ति पर जीएम/क्रिस/मुंबई में पदस्थ किया गया है. इसके साथ ही के. सम्भासिवा राव, सीपीआरओ/द.म.रे. के आंध्र प्रदेश सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने के आदेश भी जारी किए हैं. इसके अलावा 20 जनवरी को जारी एक आदेश में क्रिस में सीएमएम/डीएलडब्ल्यू आर. के. सक्सेना को जीएम/ईपीएस और रेलवे बोर्ड में कार्यरत रहे मनोज कुमार गुप्ता (आईआरएसएस) को चीफ मैनेजर/ईपीएस बनाया गया है.

रेलवे बोर्ड ने 23 जनवरी को रमेश कुमार शर्मा, एडीआरएम/मुंबई सेंट्रल, प.रे. को मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन (एमएमआरसी) के कार्यकारी निदेशक/विद्युत् के पद पर तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर जाने का आदेश जारी किया है. 20 जनवरी को जारी एक अन्य आदेश के अनुसार ट्रैफिक अधिकारी एस. एल. शर्मा (डिप्टी सीपीएम/सीएमएस, उत्तर रेलवे) डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (डीएफसीसीआईएल) में प्रतिनियुक्ति पर चले गए हैं.

तीव्र ढ़ांचागत विकास हेतु सभी संभावित स्रोतों से निवेश लाने की जरुरत है -सुरेश प्रभु

‘सीट्रैम’ का ‘पीपीपी एंड एफडीआई इन इंडियन रेलवेज’ विषय पर 15वां राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न

भारतीय रेल को अपने तीव्र ढ़ांचागत विकास के लिए सभी संभावित स्रोतों से बड़े और आवश्यक निवेश की जरुरत है. यह बात रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने 19 जनवरी को सेंटर फॉर ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड मैनेजमेंट (सीट्रैम) द्वारा तारनाका, सिकंदराबाद स्थित इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन (इरिसेट) सभागार में ‘पीपीपी एंड एफडीआई इन इंडियन रेलवेज’ विषय पर आयोजित 15वें राष्ट्रीय सेमिनार में कही है. उल्लेखनीय है कि ‘सीट्रैम’ अनुभवी इंडियन ट्रांसपोर्ट प्रोफेशनल्स की एक स्वायत्त संस्था है. सेमिनार का उदघाटन मुख्य अतिथि आंध्र प्रदेश और नवनिर्मित तेलंगाना राज्य के राज्यपाल ई.एल.एस. नरसिम्हन ने किया. इस अवसर पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु, मेंबर ट्रैफिक, रेलवे बोर्ड एवं ‘सीट्रैम’ के पदेन अध्यक्ष देवीप्रसाद पांडेय, दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक पी. के. श्रीवास्तव और सीट्रैम के सभी पदाधिकारीगण तथा पब्लिक/प्राइवेट सेक्टर की तमाम बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट हस्तियों सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे.


इस अवसर पर प्राइवेट/पब्लिक कॉर्पोरेट सेक्टर सहित तमाम अन्य कॉर्पोरेट हस्तियों सहित बड़ी संख्या में उपस्थित वरिष्ठ रेल अधिकारियों को संबोधित करते हुए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेल के तीव्र विकास का एक मजबूत ढ़ांचा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय रेल को अपने तीव्र ढ़ांचागत विकास के लिए सभी संभावित स्रोतों से बड़े पैमाने पर आवश्यक निवेश की जरुरत है. उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम भारतीय रेल के कमजोर होने के कारणों का पता लगाया जाना जरुरी है. इसके बाद समस्याग्रस्त क्षेत्रों की पहचान किए जाने और उनका सही इलाज करने के आवश्यकता है.

श्री प्रभु ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों और जन-प्रतिनिधियों द्वारा नई रेल लाइनों और नई ट्रेनों को चलाए जाने की मांग की जा रही है, मगर भारतीय रेल के वर्तमान ढ़ांचे में उनकी इन सभी मांगों को पूरा कर पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि आज सबसे पहली जरुरत रेलवे की गति क्षमता बढ़ाए जाने और विभिन्न शहरों में रेलवे के ऊर्ध्व बुनियादी एवं ढ़ांचागत विस्तार की आवश्यकता है, जिससे रेल मार्गों की क्षमता को बढ़ाया जा सकेगा. इसके लिए भारतीय रेल का तेजी से आधुनिकीकरण किया जाना जरुरी है.

रेलवे में समाप्त होनी चाहिए अंग्रेजों की बंगला प्यून की कुप्रथा

बंगला प्यून के रूप में अधिकारियों के साथ हो रहा है भारी भेदभाव
बंगला प्यून प्रथा से रेलवे को हो रहा है सालाना करोड़ों रुपए का भारी नुकसान
बंगला प्यून के रूप में रेलवे में चल रहा है पिछले दरवाजे से भर्ती का भारी भ्रष्टाचार
बंगला प्यून न तो रेलवे का कोई काम करते हैं, और न ही उनसे लिया जाता है उनका निर्धारित काम

सुरेश त्रिपाठी

भारतीय रेल में बहुत से ऐसी नीतियां (पॉलिसी) और ऐसे तमाम काम हैं, जिन पर चलना और जिनका किया जाना रेलवे हित में बिल्कुल नहीं है. ऐसे कामों और पॉलिसी का फायदा रेलवे में सिर्फ कुछ लोग ही उठा रहे हैं, बाकी कर्मचारी और अधिकारी पात्रता रखते हुए भी, खासतौर पर कार्मिक और लेखा विभाग की दादागीरी और मनमानी की वजह से ऐसे लाभों से वंचित रह जाते हैं. जैसे कि रेलवे में बंगला प्यून की नियुक्ति करवाकर इसका लगभग सभी अधिकारी दुरूपयोग कर रहे हैं. इससे रेलवे को हर साल करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है. बंगला प्यून रेलवे से सम्बंधित कोई काम नहीं करता है, बल्कि रेल अधिकारी उनसे घर का सारा काम (जैसे खाना बनाना, बर्तन धोना, झाड़ू-पोंछा करना, बच्चों को स्कूल से लाना-लेजाना, यहाँ तक कि कपड़े और टॉयलेट धोना आदि) करवाते हैं. इसके अलावा उनके साथ अमानवीय बर्ताव और उनका शोषण भी करते हैं.

कुछ रेल अधिकारियों का कहना है कि कार्मिक और लेखा विभाग के अधिकारी अपने लिए तो तुरंत कोशिश करके बंगला प्यून रखवा लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के अधिकारियों को इसके लिए बेहद परेशान करते हैं. वे उनके लिए बंगला प्यून पाने की वाजिब कोशिश भी नहीं करते हैं, बल्कि इसमें कई अड़चनें भी पैदा करते हैं, ताकि उन्हें बंगला प्यून न मिल सके. उनका कहना है कि इसके चलते ऐसे पात्र अधिकारियों को बिना बंगला प्यून के ही रहना पड़ता है, जो  वास्तव में फील्ड वर्क पर रहते हैं, वे कार्मिक और लेखा विभाग के अधिकारियों को कोसते रहते हैं. उनका यह भी कहना है कि इस सुविधा का लाभ भी चुनिंदा लोग ही ले रहे हैं. अंग्रेजों वाली इस बंगला प्यून की कुप्रथा को तुरंत बंद करना देना चाहिए, जिससे रेलवे को हर साल हो रहा करोड़ों रुपए का नुकसान बचेगा और लोगों में भेदभाव भी नहीं होगा.

उल्लेखनीय है कि पूर्व सीआरबी अरुणेंद्र कुमार, जिन्होंने कभी अपना बंगला प्यून नहीं रखा, मगर उन्होंने न सिर्फ दूसरे अधिकारियों पर दबाव डाल-डालकर तमाम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का अपने बंगले पर शोषण किया, बल्कि अपने मातहत दूसरे अधिकारियों के बंगला प्युनों का भी बहुत दुरुपयोग किया था, ने सीआरबी बनते ही न सिर्फ एक आदेश निकालकर बंगला प्युनों को रेलवे में स्थाई किए जाने की समयावधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी थी, बल्कि इस पर रेलवे बोर्ड के तीन अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई थी, जो कि इस बात की समीक्षा करने वाली थी कि अधिकारियों को बंगला प्यून की जगह उतनी ही राशि का हर माह भुगतान कर दिया जाए, जितनी राशि उनके लिए एक बंगला प्यून रखने हेतु रेलवे द्वारा भुगतान की जा रही है. परंतु इस कमेटी की कोई सिफारिश अब तक नहीं आई है.

रेल परिसर में राजीव गांधी के नाम पर कथित मेले के आयोजन से करोड़ों का घोटाला

मंडल रेल प्रबंधन एवं कुछ मंडल अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह
प्रधानमंत्री, रेलमंत्री, महाप्रबंधक और विजिलेंस को भेजी गई है लिखित शिकायत
मेले में इस्तेमाल होती है रेलवे की जमीन, बिजली, पानी और अन्य सभी संसाधन
मेले के लिए आवश्यक रेल प्रशासन एवं स्थानीय जिला प्रशासन से नहीं ली गई अनुमति

संतोष वर्मा, विशेष प्रतिनिधि/जमशेदपुर

एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में और रेलमंत्री सुरेश प्रभु रेलवे में हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं. वहीं दक्षिण पूर्व रेलवे, आद्रा मंडल के अनारा रेलवे स्टेशन परिसर में एक मान्यताप्राप्त रेल संगठन के कुछ भ्रष्ट तत्वों द्वारा 15वें राजीव गांधी मेमोरियल यूथ फेस्टिवल के नाम पर एक मेले का आयोजन करके करोड़ों रुपए की उगाही की जा रही है. इस कथित फेस्टिवल के नाम पर रेलवे की जमीन, पानी और बिजली सहित रेलवे के तमाम संसाधनों का दुरुपयोग करके रेलवे को ही लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है.

आद्रा मंडल, दक्षिण पूर्व रेलवे के अनारा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे की जमीन पर 26 जनवरी से 2 फरवरी तक आयोजित होने वाले 15वें राजीव गांधी मेमोरियल यूथ फेस्टिवल के चंदे की रसीद.

आद्रा मंडल, दक्षिण पूर्व रेलवे के अनारा रेलवे स्टेशन के समीप 15वें राजीव गांधी मेमोरियल यूथ फेस्टिवल द्वारा स्टेशन परिसर में रेलवे जमीन पर 26 जनवरी से 2 फरवरी तक मेले के आयोजन की तैयारी की जा रही है. जबकि किसी भी स्थान पर मेला लगाने से पूर्व स्थानीय जिला प्रशासन की अनुमति और रेल प्रशासन की एनओसी लेना अनिवार्य है. लेकिन तथाकथित राजीव गांधी मेमोरियल यूथ फेस्टिवल के प्रमुख कर्ताधर्ताओं ने इस मेले के आयोजन हेतु किसी भी प्रबंधन से अनुमति लेना जरुरी नहीं समझा है. जबकि इसके लिए रेलवे का बिजली, पानी और जमीन का अवैघ रुप से उपयोग किया जा रहा है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मेले में स्टॅाल लगाने के नाम पर स्टॉल संचालकों से 20-20 हजार रुपए प्रति स्टॉल के हिसाब से उगाही की जा रही है. इन तमाम अनियमितताओं और विसंगतियों की लिखित शिकायत साउथ ईस्टर्न रेलवेमेंस कांग्रेस के महामंत्री प्रहलाद सिंह द्वारा 14 जनवरी को महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व रेलवे, गार्डन रीच कोलकाता और मंडल रेल प्रबंधक, आद्रा से की गई है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री, पीएमओ सेल, रेलमंत्री तथा उनके निगरानी विभाग को भी लिखित शिकायत भेजकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है.

फिरोजपुर मंडल, उत्तर रेलवे के पांच अधिकारियों के घरों पर सीबीआई का छापा

विज्ञापन एजेंसियों के साथ मिलीभगत करके रेलवे को लगाया गया था करोड़ों का चूना
एक डीसीएम पूर्णचंद डूडी सहित पांच वाणिज्य कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज

विशष प्रतिनिधि, फिरोजपुर

फिरोजपुर मंडल, उत्तर रेलवे में हुए करीब 6.09 करोड़ रुपए के विज्ञापन घोटाले को लेकर सीबीआई ने मामला दर्ज करते हुए सोमवार, 19 जनवरी को फिरोजपुर मंडल के एक डीसीएम सहित पांच रेल कर्मचारियों के फिरोजपुर, जालंधर, लुधियाना, जम्मू और जोधपुर स्थिति घरों पर छापामारी की है. उल्लेखनीय है कि फिरोजपुर मंडल के इस घोटाले के संबंध में ‘रेलवे समाचार’ ने दि. 1 से 15 जून 2014 के अंक में ‘फिरोजपुर मंडल में करोड़ों का विज्ञापन घोटाला’ शीर्षक से विस्तृत खबर प्रकाशित की थी.

फिरोजपुर में सीएमआई अरविंद शर्मा के नवनिर्मित आलीशान बंगले के बाहर खड़े डीएसपी/सीबीआई सत्येंद्र बिष्ट.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीआई ने जिन लोगों के घरों पर छापे मारे गए हैं, उनमें तत्कालीन डीसीएम/फिरोजपुर मंडल पूर्णचंद डूडी, जो कि आजकल उत्तर रेलवे मुख्यालय, बड़ोदा हाउस, नई दिल्ली में एससीएम/प्लानिंग के पद पर पदस्थ हैं, सीएमआई अरविंद शर्मा, हेड क्लर्क नरेश शर्मा, क्लर्क मोहम्मद याकूब और लुधियाना में पदस्थ स्टेशन मास्टर आर. के. शर्मा के खिलाफ विज्ञापन एजेंसियों के साथ साठ-गांठ करके रेलवे को 6.09 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया है. सीबीआई ने यह छापे 19 जनवरी की सुबह सभी जगह एक साथ डाले थे. सीबीआई टीम की अगुआई डीएसपी सत्येंद्र बिष्ट कर रहे थे. सीबीआई ने सभी जगहों से तमाम दस्तावेज सहित सभी आरोपियों के मोबाइल भी जप्त किए हैं.

रेलवे में एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं !

सुरेश त्रिपाठी

भारतीय रेल में एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं है. इस बीच यह चर्चा सुनने में आई कि जीआरपी को रेलवे के नियंत्रण में लिया जा रहा है. इससे पूरी व्यवस्था और सर्वसामान्य जनता में भारी भ्रम की स्थिति पैदा हुई है. पहली बात यह की तमाम राज्य सरकारें अपनी पुलिस को केंद्र के नियंत्रण में देने को क्यों तैयार होंगी? दूसरी बात यह कि जीआरपी के रिजेक्टेड - डिजेक्टेड और नकारा पुलिस कर्मियों को लेकर भी रेलवे का कोई भला नहीं होने वाला है. जब तमाम देशों की रेलों में अपनी स्वतंत्र और सभी संवैधानिक अधिकारों से संपन्न एकीकृत पुलिसिंग व्यवस्था वर्षों से काम कर रही है, तो यही व्यवस्था भारतीय रेल में क्यों नहीं कायम की जा सकती है? जब राज्यों की पुलिस दूसरे राज्यों में किसी मामले की जांच के लिए जाती है, अथवा किसी आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंचती है, तो वहां की पुलिस उसे पूरा सहयोग करती है. राज्य पुलिस को यह अधिकार भारतीय संघ के अंतर्गत मिला हुआ है. क्योंकि एक राज्य की पुलिस जब दूसरे राज्य में अपने यहां घटित हुए अपराधों की छानबीन के लिए जाती है, तब वह अपने राज्य की नहीं, बल्कि भारतीय संघ की प्रतिनिधि होती है. यह व्यवस्था भारतीय संविधान में ही की गई है.

यही व्यवस्था भारतीय रेल में एकीकृत सुरक्षा एजेंसी (भारतीय रेलवे पुलिस) की स्थापना करके की जा सकती है. जो कि रेलवे के अंतर्गत होने वाले समस्त अपराधों की जांच और छानबीन के लिए उत्तरदाई होगी. वह भी राज्यों की पुलिस की ही तरह समस्त संवैधानिक अधिकारों से लैस होकर अपने दायरे में घटित होने वाले अपराधों की जांच और छानबीन राज्यों के दायरे में जाकर कर सकेगी. संघीय व्यवस्था के अंतर्गत जिस तरह अपराधों की जांच में एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करके काम करती है. ठीक उसी प्रकार से भारतीय रेलवे पुलिस भी राज्यों के साथ समन्वय करके रेलवे में घटित होने वाले अपराधों की जांच और छानबीन करेगी. दुर्भाग्य से यह संवैधानिक व्यवस्था आजादी के 67 सालों बाद भी भारत में लागू नहीं हो पाई है. इसका मतलब यह है कि आज तक भारतीय संविधान ही पूरी तरह से भारत में लागू नहीं हो पाया है. अब तक की तमाम केंद्र सरकारों द्वारा किया गया यह बहुत बड़ा राष्ट्रद्रोह है.

मध्य रेलवे को लगी मानवीय पनौती

सुरेश त्रिपाठी

मध्य रेलवे के लिए नए साल 2015 की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही. हालांकि 2 जनवरी को दिवा जंक्शन पर हुआ हंगामा पूरी तरह मानव-निर्मित और प्रायोजित था. वरना पेंटोग्राफ टूटने के करीब दो-ढ़ाई घंटे बाद यह हंगामा होने का कोई कारण नहीं था. तथापि मध्य रेलवे को पिछले करीब एक साल से लगी पनौती इसके अधिकारियों और प्रशासन द्वारा भी निर्मित की गई है. यही वजह है कि पिछले लगभग एक-डेढ़ साल से न तो इसका उपनगरीय रेल नेटवर्क सही काम कर पा रहा है, और न ही इसका प्रशासनिक तंत्र. काफी समय से मध्य रेल के सम्पूर्ण सबर्बन सेक्शन की प्रॉपर मेंटेनेंस नहीं हुई है. इसी वजह से आए दिन इसकी लोकल गाड़ियों सहित मेल-एक्स. गाड़ियां भी कहीं न कहीं डिरेल होकर लुढ़की रहती हैं. जले में खाज की स्थिति इसके ट्रैक्शन कन्वर्जन ने पैदा की है. इगतपुरी से लेकर मुंबई सीएसटी और लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक का सम्पूर्ण ट्रैक्शन कन्वर्जन का यह काम ठेके पर करवाया गया है, जिसमें अब तक करीब 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं. तथापि 10 साल में भी यह काम अब तक पूरा नहीं हुआ है.

सर्वप्रथम जब इगतपुरी और कसारा के बीच एसी ट्रैक्शन चार्जिंग हुई थी, तब उसके एक-डेढ़ महीने के दरम्यान ही मुंबई मंडल, मध्य रेल के लगभग सारे लोको के पेंटोग्राफ ओएचई में फंसकर टूट गए थे. जबकि एक पेंटोग्राफ की कीमत कई लाख रुपए है. अब यही स्थिति कल्याण और मुम्ब्रा-कलवा के बीच है, क्योंकि करीब एक साल पहले इन दोनों स्टेशनों की चारों लाइनों तथा लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक दो फास्ट लाइनों पर एसी ट्रैक्शन चार्जिंग हो चुकी है. इसीलिए इन दोनों स्टेशनों के बीच भी पिछले एक साल में लगभग हर दूसरे दिन या तो ओएचई टूटा है, या फिर उसमें फंसकर कोई न कोई पेंटोग्राफ जला है. उस दिन भी डोम्बिवली और ठाकुर्ली के बीच सुबह करीब 6.43 बजे पेंटोग्राफ ही टूटा था. जिसकी वजह से पीक ऑवर में न सिर्फ लोकल गाड़ियां डिस्टर्ब हुई थीं, बल्कि रेलवे का करोड़ों रुपए का नुकसान भी हो गया.

इतने बड़े पैमाने पर पेंटोग्राफ के टूटने और लोकोशेड द्वारा नए पेंटोग्राफ की अचानक बढ़ी इस मांग को पूरा न कर पाने के कारण कई महीनों तक मुंबई मंडल के तमाम एसी/डीसी लोको को दो के बजाय सिर्फ एक पेंटोग्राफ पर चलाना पड़ा था. तब भी इतने बड़े पैमाने पर हुए इस नुकसान और भारी लापरवाही के लिए किसी की जिम्मेदारी सुनिश्चित नहीं की गई थी. यदि ट्रैक्शन कन्वर्जन के बाद का मुंबई मंडल, मध्य रेल का रिकॉर्ड देखा जाए, तो पता चलेगा कि यहां लगभग हर दूसरे दिन ओएचई में आई खराबी के कारण गाड़ियों के संचालन में भारी डिस्लोकेशन हुआ है, जो कि अब भी लगातार जारी है. इसके कारण मुंबई महानगर का और मध्य रेल का कितना बड़ा नुकसान हुआ है, इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है. इस राष्ट्रद्रोह के लिए कौन दोषी है, सरकार और रेल प्रशासन को इसकी भी कोई चिंता नहीं जान पड़ती है.

सेवा के अंतिम दिन किसी महाप्रबंधक द्वारा कोई निर्णय क्यों लिए जाने चाहिए?

भारतीय रेल में सेवा के अंतिम दिन उच्च अधिकारियों द्वारा कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है. उनके इन निर्णयों में कर्मचारियों और खासतौर पर अधिकारियों के डीएआर मामलों में दंड को कम करने अथवा पूरी तरह से माफ कर देने के मामले ज्यादा देखने में आ रहे हैं. अधिकारियों का आरोप है कि यह काम ‘कैश अथवा काइंड’ की बदौलत किया जाता है. यहां तक कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पिछली तारीखों में फाइलें निपटाने के मामले भी सामने आ रहे हैं. ऐसे ही कई मामले पूर्व मध्य रेलवे के सामने आए हैं.

पता चला है कि 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अभी भी अपने घर पर बैठकर फाइलें निपटा रहे हैं और उन पर पिछली तारीखों में ऑर्डर पास कर रहे हैं. यह भी बताया गया है कि कई मामलों में उन्होंने आरोपी अधिकारियों को अपने घर पर बुलाया और उनके मामले की गंभीरता के अनुसार कैश अथवा काइंड की बदौलत उनके मामलों को पिछली तारीखों में या तो रफादफा कर दिया, अथवा उन्हें एकदम क्लीन चिट देकर पूरी तरह से उनका मामला ही खत्म कर दिया है. ऐसे कुछ मामलों के उदाहरण इस प्रकार हैं..

1. सीनियर डीपीओ/मुगलसराय सुरेश श्रीवास्तव का एक मामला पूरी तरह से ‘डायल्यूट’ कर दिया गया है. बताते हैं कि इसकी एवज में उनसे 20 लाख रुपए लिए गए हैं? जबकि सीनियर डीपीओ/मुगलसराय सुरेश श्रीवास्तव को ‘लार्सजेस’ की भर्ती में 133 परीक्षा पुस्तिकाओं में नंबरों की हेराफेरी करते हुए रात के 10.30 बजे मुगलसराय मंडल, पूर्व मध्य रेलवे के अपर मंडल रेल प्रबंधक के नेतृत्व में आरपीएफ ने पकड़ा था. रेलवे बोर्ड विजिलेंस का पत्र (संख्या 2013/वी4/ईसीआर/पीएनएल/35, दि. 22.11.2013) और पूर्व मध्य रेलवे का पत्र (संख्या ईसीआर/विजलेंस/वी-2/गजटेड/एमजीएस/04-13/25, दि. 09.09.2013) तथा इस संबंध में सीपीओ/पू.म.रे. द्वारा रेलवे बोर्ड को भेजा गया जवाब इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सीनियर डीपीओ/मुगलसराय सुरेश श्रीवास्तव के खिलाफ ‘लार्सजेस’ की भर्ती मामले में गंभीर आरोप हैं.

रेलवे बोर्ड को अपना आदेश लागू करवाने की कोई चिंता नहीं !

एक पूर्व डिप्टी सीएमएम/हाजीपुर का पूर्व जीएम/पू.म.रे. ने जबरदस्त फेवर किया है. उल्लेखनीय है कि इस डिप्टी सीएमएम को गलत सीनियारिटी दिए जाने के मामले में रेलवे बोर्ड (पत्र संख्या ई(जीपी)2006/1/36, दि. 15.07.2013) ने जे. ए. ग्रेड से रिवर्ट करने के आदेश दिया था. कार्मिक अधिकारियों द्वारा रेलवे बोर्ड का उक्त आदेश लागू करने हेतु लोकल रिवर्सन ऑर्डर के लिए तत्संबंधी फाइल कई बार जीएम के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बावजूद जीएम ने फाइल पर आदेश नहीं किए, जिससे न सिर्फ अंत तक इस डिप्टी सीएमएम का रिवर्सन नहीं किया जा सका, बल्कि यह मामला अंत तक लटका रहा और अब यह अत्यंत गंभीर कानूनी दांव-पेंच वाला मामला बन चुका है. इस मामले में बार-बार जीएम द्वारा आधारहीन प्रश्नचिन्ह लगाए जाते रहे और ऐसा ही उन्होंने 23 अगस्त 2013 से लेकर अंत तक किया.

इसके परिणामस्वरूप इस डिप्टी सीएमएम को भरपूर समय मिला, जो कि पूर्व जीएम ने जानबूझकर उसे उपलब्ध करवाया. इसके फलस्वरूप पटना कैट से 28 अगस्त 2013 को यह डिप्टी सीएमएम अपने रिवर्सन के खिलाफ स्थगनादेश लेने में कामयाब रहा. इस प्रकार कार्मिक अधिकारियों को बार-बार के आधारहीन सवालों में उलझाकर पूर्व जीएम ने न सिर्फ कार्मिक अधिकारियों को रेलवे बोर्ड का आदेश लागू करने से रोका, बल्कि उन्होंने इस डिप्टी सीएमएम को इस मामले को हर तरह से क़ानूनी दांव-पेंच में उलझाने का भी भरपूर मौका उपलब्ध करवाया. अधिकारियों का कहना है कि डिप्टी सीएमएम का रिवर्सन ऑर्डर इसलिए तामील नहीं हो पाया, क्योंकि पूर्व जीएम और यह डिप्टी सीएमएम पुराने क्लास-फेलो रहे हैं.

हावड़ा-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस में एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. की अवैध यात्रा?

मीडिया को कोई स्पष्टीकरण देने की उनकी जिम्मेदारी नहीं है - एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे.

जब कोई रेल अधिकारी या कर्मचारी किसी प्रकार की गलती करता है, अथवा उनसे जाने-अनजाने अपनी ड्यूटी के दौरान ऐसी कोई गलती हो जाती है, जो कि रेलवे के निर्धारित नियमों के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में आती है, तब रेलवे विजिलेंस के लोग उनकी गर्दन मरोड़ देने की हद तक उन पर अन्याय और अत्याचार करते देखे जाते हैं. मगर जब ऐसी ही कोई गलती खुद विजिलेंस अधिकारी और कर्मचारी करते हैं, तो ‘समरथ को नहिं दोष गुसाईं’ की तर्ज पर उन्हें क्षम्य मान लिया जाता है. और जब ऐसी ही कोई भयानक गलती जानबूझकर खुद जोनल रेलवे विजिलेंस का मुखिया यानि वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी (एसडीजीएम/सीवीओ) करता है, तो उसे ‘एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी’ कहा जाता है.

ऐसी ही चोरी और सीनाजोरी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एसडीजीएम/सीवीओ ने 9 जनवरी को की है. विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. ने 9 जनवरी को गाड़ी संख्या 12262 हावड़ा - मुंबई सीएसटी दूरंतो एक्सप्रेस में बिलासपुर से मुंबई सीएसटी तक अनधिकृत तरीके से अपनी पत्नी के साथ यात्रा की है. सूत्रों से पता चला है कि उन्होंने अपने और अपनी पत्नी के नाम से उसी दिन लिए गए बिलासपुर से सीएसटीएम के मेडिकल पास (संख्या 047314 एवं 047315) पर यह यात्रा की है. बताते हैं कि यह गाड़ी बिलासपुर में शाम को करीब 5.30 बजे पहुंचती है. जहां इसका सिर्फ टेक्निकल हाल्ट है. वहां से इस गाड़ी में न तो कोई बुकिंग की जा सकती है, और न ही इसमें बोर्डिंग हो सकती है.

तथापि एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. ने बिलासपुर से न सिर्फ इस गाड़ी में बोर्डिंग की, बल्कि बिलासपुर से सीएसटीएम तक इसमें यात्रा भी की है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उनके साथ चेकिंग के नाम पर ओ. पी. सिंह एवं राजेश कुमार नामक दो विजिलेंस इंस्पेक्टर भी गाड़ी में चढ़े थे. जिनको गाड़ी में चेकिंग के नाम पर लिनन कांट्रेक्टर का निजी स्टाफ मिला, जिसके पास प्रॉपर ट्रेवल अथॉरिटी नहीं थी. इसी का जॉइंट नोट बनाकर यह दोनों विजिलेंस इंस्पेक्टर रात को नागपुर में गाड़ी से उतर गए थे. जबकि एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. एस. के. सिंघला अपनी पत्नी श्रीमती मोना सिंघला के साथ दूसरे दिन सुबह मुंबई सीएसटी में उतरे थे.

‘सीट्रैम’ का वार्षिक समारोह 19 जनवरी को सिकंदराबाद में

सेंटर फॉर ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड मैनेजमेंट (सीट्रैम) का वार्षिक समारोह का आयोजन इस बार सिकंदराबाद स्थित इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन (इरिसेट) ऑडिटोरियम में 19 जनवरी को हो रहा है. समारोह का उदघाटन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यपाल करेंगे. इस अवसर पर ‘सीट्रैम’ द्वारा आजकल के ज्वलंत विषय ‘पीपीपी एंड एफडीआई इन इंडियन रेलवेज’ पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन किया जा रहा है. इस सेमिनार का उदघाटन रेलमंत्री सुरेश प्रभु करेंगे. इस मौके पर मेंबर ट्रैफिक, रेलवे बोर्ड देवी प्रसाद पांडेय सहित रेलवे बोर्ड एवं कॉर्पोरेट सेक्टर और ‘सीट्रैम’ से जुड़े वरिष्ठ एवं अनुभवी वक्ता अपने विचार प्रस्तुत करेंगे.

जानकारों का मानना है कि ‘सीट्रैम’ ने एक अत्यंत समसामयिक विषय पर इस बार सेमिनार का आयोजन किया है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेलमंत्री सुरेश प्रभु का यह बहुत ही प्रिय विषय है. उम्मीद है कि इस सेमिनार के जरिए देश के निजी कॉर्पोरेट सेक्टर और रेलवे सहित सार्वजानिक क्षेत्र में पीपीपी एवं एफडीआई के महत्व को बेहतर ढ़ंग से प्रतिपादित किया जा सकेगा. इसके अलावा इस बार ‘सीट्रैम’ ने तीन तकनीकी सत्रों में क्रमशः ‘एफडीआई/निजी निवेश के संबंध में सरकारी नीतियों और परिप्रेक्ष्य पर एक नजर’, एफडीआई/निजी निवेश के माध्यम से क्षमता निर्माण’ एवं ‘निवेश आकर्षित करने हेतु अभिनव योजनाएं’ विषयों पर चर्चा-सत्र भी आयोजित किए हैं. यह तीनों विषय भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन पर काफी गंभीर चर्चा होने वाली है.

रेल की सुरक्षा पर रेल मंत्रालय की जो भी संस्तुति होगी, गृह मंत्रालय उसको अक्षरशः स्वीकार करेगा -राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री

रेलयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा -सुरेश प्रभु, रेलमंत्री
अनिवार्य और अपरिहार्य सुविधाएं आरपीएफ को उपलब्ध करवाई जाएंगी -मनोज सिन्हा, रेल राज्यमंत्री
अखिल भारतीय रेल सुरक्षा बल संगठन की 22वीं वार्षिक सर्वसाधारण सभा संपन्न

अखिल भारतीय रेल सुरक्षा बल संगठन (एआईआरपीएफए) की तीन दिवसीय 22वीं वार्षिक सर्वसाधारण सभा (एजीएम) स्टेट एंट्री रोड, नई दिल्ली स्थित संगठन कार्यालय परिसर में 7 से 9 जनवरी को संपन्न हुई. इस एजीएम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रेलमंत्री सुरेश प्रभु, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, सांसद द्वय प्रहलाद पटेल एवं राजीव पांडेय, मेंबर स्टाफ, रेलवे बोर्ड प्रदीप कुमार, डीजी/आरपीएफ कृष्ण चौधरी, जीएम/उ.रे. ए. के. पुठिया, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन के महामंत्री एम. राघवैया, ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा, फेडरेशन ऑफ़ रेलवे ऑफिसर्स एसोसिएशंस के महामंत्री आर. आर. प्रसाद, इंडियन रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेशन के महामंत्री रमन शर्मा सहित एआईआरपीएफए के अध्यक्ष एस. आर. रेड्डी, महामंत्री यू. एस. झा, कोषाध्यक्ष धरमवीर सिंह, सह-महामंत्री बी. एल. बिश्नोई , समाजसेवी पी. एन. पाठक और सभी जोनल एवं उत्पादन इकाईयों के प्रतिनिधि मंडल तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी उपस्थित थे.

इस अवसर पर सर्वप्रथम एआईआरपीएफए के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत पुष्प-गुच्छ देकर किया गया. मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत एआईआरपीएफए के महामंत्री यू. एस. झा ने और विशिष्ट अतिथि रेलमंत्री सुरेश प्रभु का स्वागत एआईआरपीएफए के अध्यक्ष एस. आर. रेड्डी ने पुष्प-गुच्छ देकर किया. एआईआरपीएफए के महामंत्री श्री झा ने सभी अतिथियों को संबोधित करते हुए अपने स्वागत भाषण में कहा कि एआईआरपीएफए और सभी आरपीएफ कर्मियों का यह दृढ़-संकल्प है कि भारतीय रेल में जो करीब तीन करोड़ लोग रोजाना यात्रा करते हैं, उनकी सुरक्षा हम अपनी जान की बाजी लगाकर सुनिश्चित करते हैं.


अखिल भारतीय रेल सुरक्षा बल संगठन की 22वीं वार्षिक सर्वसाधारण सभा के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय रेल सुरक्षा बल संगठन के महामंत्री यू. एस. झा.

उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के संविधान की धारा 246 के अंतर्गत केंद्रीय सूची 22 में रेलवे विषय है, तथा एंट्री 30 में जो रेल यात्रियों के जान-माल और माल ढुलाई से सम्बंधित केंद्रीय सूची के अपराध हैं, उन सब अपराधों को रोकने का जिम्मा केंद्र सरकार (रेल मंत्रालय) का है. डॉ. रामसुभग सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में बहुत स्पष्ट सिफारिश की है कि रेल यात्री और रेल संपत्ति से सम्बंधित रेलवे के समस्त अपराधों को रोकने की जिम्मेदारी रेल मंत्रालय की है. इन्हें नहीं रोक पाने की स्थिति में उस क्षति की भरपाई रेलवे द्वारा किए जाने का स्पष्ट प्रावधान भारतीय संविधान में किया गया है. यही प्रावधान पूरे विश्व की रेलों में भी है. इंग्लैंड, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा और चीन आदि सभी देशों की रेलों में सभी कानूनी शक्तियों से संपन्न उनकी अपनी स्वतंत्र फोर्स और सुरक्षा व्यवस्था है. लेकिन भारत में ऐसा आज तक नहीं हो पाया है. यह अत्यंत दुर्भाग्य की बात है.

श्री झा ने कहा कि इसका कारण आपको और सरकार को हम विस्तार से बाद में समय लेकर समझाएंगे, क्योंकि यहां समय कम है. हम आपको ऐसी-ऐसी जानकारी देंगे कि आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इस जनतांत्रिक और आजाद देश में इतनी धांधली और इतनी दादागीरी चल रही है की आजादी के 67 साल बाद भी इस देश में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा कि रोज तीन करोड़ रेल यात्री भयाक्रांत होकर यात्रा करें, यह अत्यंत दुर्भाग्य की बात है. यह सब हम और आपके लोग ही हैं. यह सब विभिन्न राज्यों से आते हैं, ये संगठित नहीं हैं, इसलिए ऐसे निरपराध लोगों को कोई भी मामूली गुंडा एक छुरी दिखाकर लूट लेता है. ऐसे निराश्रित और निर्दोष लोगों को बचाना, उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराना, यह जिम्मेदारी और मर्दानगी इस देश की और इस सरकार की है.

अखिल भारतीय रेल सुरक्षा बल संगठन की 22वीं वार्षिक सर्वसाधारण सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मैं अपराधबोध से ग्रसित हूँ कि अत्यधिक व्यस्तता के कारण अंत-अंत तक मैं यह तय नहीं कर पा रहा था कि मैं इस कार्यक्रम में पहुंच पाउंगा या नहीं, तथापि एक महत्वपूर्ण बैठक होने के बावजूद मैंने उसे स्थगित किया और यह तय किया कि मुझे इस कार्यक्रम में जरुर जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां तक आरपीएफ के महत्व की बात है, तो मैं समझता हूँ कि इस पर बहुत ज्यादा विस्तार में जाने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि इस महत्व को सब जानते हैं. हम तो बचपन से आरपीएफ के महत्व को समझते आए हैं.

यात्री सुविधा के कार्यों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए -राजीव मिश्र

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने बुधवार, 14 जनवरी को सभी विभाग प्रमुखों की बैठक में रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के विस्तार पर विचार-विमर्श किया. पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों - लखनऊ, वाराणसी एवं इज्जतनगर के मंडल रेल प्रबंधक भी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए चर्चा में शामिल थे. इस अवसर पर यात्री सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र बताते हुए महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने यात्री सुविधा के कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया. उन्होंने मंडल रेल प्रबंधकों से अपने मंडलों में कुछ स्टेशनों को चिन्हित कर वहां यात्री सुविधाओं को उन्नत किए जाने का निर्देश दिया.


महाप्रबंधक श्री मिश्र ने वर्तमान वित्त वर्ष में 31 मार्च, 2015 तक चिन्हित स्टेशनों पर उपलब्ध कराई जाने वाली यात्री सुविधाओं पर सम्बंधित विभाग प्रमुखों एवं मंडल रेल प्रबंधकों से चर्चा की. चर्चा में मंडल रेल प्रबंधकों 10 स्टेशनों को यात्री सुविधा की दृष्टि से विकसित किए जाने की बात कही. नयी कार्य-योजना के व्यवहारिक पक्षों पर चर्चा करते हुए महाप्रबंधक श्री मिश्र ने उन्हीं कार्यों को इसमें शामिल किए जाने का निर्देश दिया, जो वर्तमान वित्त वर्ष में पूरे हो जाएं. उन्होंने इन कार्यों हेतु धन की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा भी दिया.

अपनी अवधारणा को स्पष्ट करते हुए महाप्रबंधक ने कहा कि यात्री सुविधाओं में होने वाले सुधार स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने चाहिए. उन्होंने निर्देश दिया कि कार्य सम्पादन के अंतर्गत यह अवश्य सुनिष्चित किया जाए कि उपलब्ध कराए जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता उच्च कोटि की हो, जिससे उसका लम्बे समय तक उपयोग किया जा सके. श्री मिश्र ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं स्टेशनों के मास्टर प्लान के अनुरूप ही हों और उनमें एकरूपता का भी ध्यान रखा जाए.

क्या भारतीय रेल अरुणेंद्र कुमार और उनकी बीवी की जागीर है?

श्रीमान सुरेश त्रिपाठी जी !
संपादक, "परिपूर्ण रेलवे समाचार"

महोदय..

भारतीय रेल में अत्यंत लोकप्रिय और पूरी भारतीय रेल में बहुत ही ध्यान से पढ़े जाने वाले आपके "परिपूर्ण रेलवे समाचार" के सभी संस्करण हम बहुत ध्यान से पढ़ते हैं. इसके अलावा रेल अधिकारियों एवं रेल कर्मचारियों द्वारा बहुत ज्यादा पढ़ी जाने वाली आपकी वेबसाइट www.railsamachar.com पर हम तमाम खबरें लगातार पढ़ते रहते हैं. भारतीय रेल की जिन सच्चाईयों को आप उजागर करते हैं, वह न सिर्फ काबिले तारीफ है, बल्कि आपके इस अखबार और वेबसाइट से भारतीय रेल के कुछ भ्रष्ट और कदाचारी अधिकारियों पर भी काफी हद तक एक लगाम सी लगी रहती है. तथापि, आपके बहुत लिखने के बावजूद पूर्व अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड अरुणेंद्र कुमार पर सिर्फ इतना ही असर पड़ा कि वह सचेत रहकर अपने दुष्कर्मों को अंजाम देते रहे, हालांकि आपने उनके इन सब दुष्कर्मों को समय-समय पर उजागर भी किया है.

अरुणेंद्र कुमार के बारे में बहुत कुछ बुरा बोला और लिखा जा सकता है. किन्तु, क्योंकि जनाब अब सेवानिवृत हो चुके हैं, अतः इस बारे में अब कुछ ज्यादा कहने के लिए काफी देर हो चुकी है. तथापि, आज भी एक पहलू ऐसा है जिस पर आपसे अनुरोध है कि आप इस सच्चाई को उजागर करें.

अरुणेंद्र कुमार की तथाकथित धर्मपत्नी कांताबाई के भी कई कारनामे आपने कई बार छापे हैं, लेकिन इस बेशर्म दंपत्ति पर कोई फर्क ही नहीं पड़ता. विगत दो वर्षों में इनके घर पर अब तक रेलवे के तक़रीबन 10-12 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इन दोनों के शोषण का शिकार होते रहे हैं. इसमें गौर करने वाली बात यह है कि रेल कर्मियों के शोषण करने की इन दोनों की आदत आज भी पूरे जोर-शोर पर जारी/चालू है.

इनकी आदत यह रही है कि ये जनाब उन कर्मचारियों के कंट्रोलिंग अधिकारियों को इतना परेशान करते हैं कि वे सम्बंधित अधिकारी इनसे डरकर कर्मचारियों को जबरदस्ती परेशान करते हैं, जिससे कि वे न चाहते हुए भी इनके घर पर जाकर काम करें.

मेंबर ट्रैफिक किसको बनाया जाए, इस पर अभी-भी पेंच कायम

इसी महीने के अंत में 31 जनवरी को मेंबर ट्रैफिक, रेलवे बोर्ड के पद से देवीप्रसाद पांडेय भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसलिए अब मेंबर ट्रैफिक के लिए ट्रैफिक कैडर में भारी हलचल मची हुई है. किसे मेंबर ट्रैफिक बनाया जाए, इस पर भारी पेंच कायम है. इस मुद्दे पर लगभग सभी ट्रैफिक अधिकारी अपने पूर्ववर्तियों (शांति नारायण से लेकर देवीप्रसाद पांडेय तक) को कोस रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड स्तर पर दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. पहला विकल्प यह है कि चार-पांच वरिष्ठतम ट्रैफिक अधिकारियों में से किसी एक को मेंबर ट्रैफिक का लुक आफ्टर चार्ज सौंप दिया जाए. दूसरा विकल्प यह कि 1979 बैच के जीएम बनने के सबसे निकटस्थ वरिष्ठ वरिष्ठ ट्रैफिक अधिकारी मोहम्मद जमशेद (वर्तमान मुख्य परिचालन प्रबंधक, उत्तर रेलवे) को सीधे मेंबर ट्रैफिक का चार्ज दे दिया जाए, भले ही इसके लिए मेंबर ट्रैफिक की पोस्ट को डाउन ग्रेड करना पड़े.

रेलवे बोर्ड के हमारे विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि दूसरे विकल्प का अन्य कैडर के अधिकारी यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि यदि मोहम्मद जमशेद को अभी ही बोर्ड में मेंबर बना दिया जाएगा, तो वह अगले सीआरबी के लिए मजबूत दावेदार बन जाएंगे. इसलिए उनके इस विरोध को देखते हुए पहले विकल्प के तौर पर वर्तमान एडीशनल मेंबर/कमर्शियल अजय शुक्ला अथवा अपर महाप्रबंधक, दक्षिण मध्य रेलवे, सुनील कुमार अग्रवाल जैसे किसी वरिष्ठ ट्रैफिक अधिकारी को मेंबर ट्रैफिक की डाउन ग्रेडेड पोस्ट पर बैठाकर करीब आठ-दस महीने तक काम चलाने की बात हो रही है, क्योंकि अगले जीएम पैनल में मोहम्मद जमशेद जब जीएम बन जाएंगे, तब उन्हें भी देवीप्रसाद पांडेय की तरह तीन महीने बाद जीएम से उठाकर मेंबर ट्रैफिक बना दिया जाएगा.

हेमंत कुमार को रेलवे बोर्ड का नया मेंबर मैकेनिकल बनाया गया

अब महाप्रबंधकों के कुल छह पद खाली हो गए

हेमंत कुमार को रेलवे बोर्ड का नया मेंबर मैकेनिकल (पदेन सचिव, भारत सरकार) बनाया गया है. मंगलवार, 13 जनवरी को दोपहर में रेलवे बोर्ड से जारी हुए नियुक्ति आदेश के तुरंत बाद उन्होंने अपना नया कार्यभार तत्काल ग्रहण कर लिया. बतौर मेंबर मैकेनिकल रेलवे बोर्ड जाने से पहले हेमंत कुमार 20 दिसंबर 2013 से पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत थे. उनके नेतृत्व में पश्चिम रेलवे ने पर्याप्त प्रगति की और बतौर महाप्रबंधक उनका कार्यकाल निर्विवाद रहा है. स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिस (एससीआरए) 1973 बैच के वरिष्ठ यांत्रिक अधिकारी हेमंत कुमार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है. इसके अलावा वह एक कुशल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर होने के साथ ही डीजल लोकोमोटिव में काम करने का उन्हें व्यापक अनुभव भी प्राप्त है. जमालपुर स्थित इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (आईआरआईएमईई) से पढ़ाई करके निकालने वाले हेमंत कुमार बाद में यहां कुछ समय तक प्राध्यापक भी रहे हैं. वह मेंबर मैकेनिकल के पद पर 30 नवंबर 2016 तक रहेंगे.

जैसा कि ‘रेलवे समाचार’ ने पहले ही लिखा था कि हेमंत कुमार की 31 दिसंबर को नए सीआरबी ए. के. मित्तल, नए मेंबर स्टाफ प्रदीप कुमार और नए मेंबर इलेक्ट्रिकल नवीन टंडन के साथ बतौर मेंबर मैकेनिकल नियुक्ति न हो पाने की वजह पूर्व सीआरबी की कुछ कारस्तानी रही है, मगर मेंबर मैकेनिकल के पद पर हेमंत कुमार की ही नियुक्ति की जाएगी, जो कि अंततः सही साबित हुई है. रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा बहुत सही और न्यायपूर्ण तरीके से बोर्ड के वर्तमान सभी मेंबरों की नियुक्ति की गई है. अब न सिर्फ रेलवे बोर्ड का कोरम पूरा हो गया है, बल्कि वर्तमान में रेलवे बोर्ड के ये सभी मेंबर कुशल, काबिल और ईमानदारी से अपने दायित्वों का पालन करने वाले हैं. इस बात की सभी रेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारी खुशी जाहिर की है.

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 ...

Latest News



Copyright © 2014
Designing & Development by SW