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मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर    ||    ‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी    ||    रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत    ||    दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान    ||    एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..    ||    असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस    ||    रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन    ||    पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता    ||    पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर    ||    चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन    ||    पश्चिम मध्य रेल ने उल्लासपूर्वक मनाया स्वतंत्रता दिवस समारोह    ||    आईआरपीएस अधिकारी राकेश कुमार को 70 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा    ||    आईआरसीटीसी के पूर्व सीआरएम के. एम. त्रिपाठी को पांच साल की जेल    ||    ‘फतेली’ रेलवे कॉलोनी की ‘फटी’ हालत के चलते रेल आवास छोड़ने को मजबूर रेलकर्मी    ||    उत्तर मध्य रेलवे परिक्षेत्र में रेलवे क्रासिंग पर नियुक्त होंगे गेट-मित्र    ||    एसी चैम्बर्स में बैठे अपात्र अधिकारी लगा रहे हैं रेलवे को लाखों का चूना    ||    फैजाबाद रेलवे स्टेशन की बहाल हुई सफाई व्यवस्था    ||    जीएम पैनल और एमएल की नियुक्ति का फिलहाल कोई पता नहीं    ||    रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारी, मोदी सरकार का सराहनीय प्रयास    ||    फिरोजपुर मंडल : स्टोर्स के टेंडरों पर लग रही हैं डिस्पैच की नकली मोहरें

Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact : 09869256875. Email : railwaysamachar@gmail.com

मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर    ||    ‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी    ||    रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत    ||    एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..    ||    असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस    ||    रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन    ||    पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता    ||    पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर    ||    चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन    ||    पश्चिम मध्य रेल ने उल्लासपूर्वक मनाया स्वतंत्रता दिवस समारोह    ||    आईआरपीएस अधिकारी राकेश कुमार को 70 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा    ||    आईआरसीटीसी के पूर्व सीआरएम के. एम. त्रिपाठी को पांच साल की जेल    ||    ‘फतेली’ रेलवे कॉलोनी की ‘फटी’ हालत के चलते रेल आवास छोड़ने को मजबूर रेलकर्मी    ||    उत्तर मध्य रेलवे परिक्षेत्र में रेलवे क्रासिंग पर नियुक्त होंगे गेट-मित्र    ||    एसी चैम्बर्स में बैठे अपात्र अधिकारी लगा रहे हैं रेलवे को लाखों का चूना    ||    फैजाबाद रेलवे स्टेशन की बहाल हुई सफाई व्यवस्था    ||    जीएम पैनल और एमएल की नियुक्ति का फिलहाल कोई पता नहीं    ||    रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारी, मोदी सरकार का सराहनीय प्रयास    ||    फिरोजपुर मंडल : स्टोर्स के टेंडरों पर लग रही हैं डिस्पैच की नकली मोहरें    ||    दो एएनओ द्वारा ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ का दुरुपयोग

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मुंबई मंडल, म.रे. के एक खास ठेकेदार का लगातार किया जा रहा है फेवर

एक अन्य इंजीनियरिंग ठेकेदार फर्जी काम के करीब साढ़े तीन करोड़ लेकर गायब

मध्य रेल, मुंबई मंडल का इंजीनियरिंग विभाग हमेशा से कुछ खास ठेकेदारों का फेवर करता रहा है. और जब बात बिरादरी की हो, तो यह फेवर आंख बंद करके दूध पीने वाली बिल्ली की तरह और भी बेशर्मी से किया जाता है. यही स्थिति पिछले दो साल से मुंबई मंडल, मध्य रेलवे के एक खास इंजीनियरिंग ठेकेदार के साथ चल रही है. यहां ठेकेदार एवं अधिकारी ‘मौसेरे भाई’ हो गए हैं, जिससे ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ वाली कहावत अब बदल गई है.

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडल के एक खास ठेकेदार को फेवर करने के लिए उत्तर-पूर्व सेक्शन के कई इंजीनियरिंग कार्यों को क्लब करके एक बड़ा टेंडर किया गया. यह टेंडर 14 अगस्त को ओपन हुआ है. इसकी कुल लागत 4.30 करोड़ रुपए रखी गई है. सूत्रों का कहना है कि 4.30 करोड़ का यह टेंडर उक्त खास ठेकेदार के लिए ही बनाया गया था और आखिर उसे ही मिल गया है. बताते हैं कि इससे पहले जब यह टेंडर कई कार्यों को क्लब करके करीब 4.70 करोड़ का बनाया गया था, तब मंडल के कई इंजीनियरिंग अधिकारियों सहित कुछ ठेकेदारों के कथित विरोध के बहाने इसे घटाकर बाद में 4.30 करोड़ का कर दिया गया.

‘लार्जेस’ पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी

रेलवे बोर्ड ने श्रमिक संगठनों से पंगा न लेने के लिए कैट के निर्णय को दबा दिया

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने कुछ समय पहले रेलवे के मान्यताप्राप्त श्रमिक संगठनों के दबाव में 57 साल तक की आयु पूरी कर चुके सेफ्टी कैटेगरी के रेल कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना शुरू की थी. पहले इसमें 55 साल तक आयु सीमा थी, जिसे बाद में श्रमिक संगठनों के ही दबाव में बढ़ाकर 57 साल किया गया था. इस योजना के तहत 57 साल की आयु पूरी कर चुके सेफ्टी कैटेगरी के रेल कर्मचारी पूरे सेवानिवृत्ति लाभ के साथ सेवानिवृत्त होकर अपनी जगह अपने किसी एक बच्चे या किसी सगे-सम्बंधी को रेलवे की नौकरी पर रखवा सकते हैं.

हालांकि इस योजना का पूरा नाम भी शायद किसी श्रमिक नेता और रेल अधिकारी को याद नहीं होगा, मगर शार्ट में इसे ‘लार्जेस’ (एलएआरएसजीईएसएस) कहा जाता है. इस योजना का भारी दुरुपयोग हुआ है. कई श्रमिक नेताओं ने अपने खास और आगे-पीछे घूमने वाले लोगों तक ही इस योजना का लाभ पहुंचाया है, जबकि इससे असल में लाभान्वित होने वाले अधिकांश कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया को इतना जटिल और अधिकारियों एवं श्रमिक नेताओं की ही समझ में आने वाला बनाया गया है कि कोई भी पात्र कर्मचारी बिना उन्हें दान-दक्षिणा चढ़ाए इस योजना का लाभ नहीं ले सकता है, और न ही अब तक कोई कर्मचारी यह लाभ ले पाया है.

रेल टिकट की बिक्री के विकेंद्रीकरण का चौतरफा स्वागत

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने 8 अगस्त को एक कमर्शियल सर्कुलर (नंबर 33/2014) जारी करके रेलवे की आरक्षित एवं अनारक्षित टिकटों की बिक्री का विकेंद्रीकरण किए जाने को मंजूरी दे दी है. इससे अब सभी यूटीबीएस के साथ सभी पूर्व रेलवे टिकट सर्विस एजेंट (आरटीएसए) को आरक्षित एवं अनारक्षित रेल टिकटों की बिक्री करने की सुविधा विस्तारित होगी. उल्लेखनीय है कि हाल ही में रेलवे बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की आड़ में नियमों को तोड़-मरोड़कर देश भर में फैले करीब एक हजार आरटीएसए की मान्यता तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी थी और रेलमंत्री पर भी कुछ इस तरह का दबाव बनाया हुआ था कि वह चाहकर भी इस मामले में आरटीएसए की अपील पर कुछ नहीं कर पाए थे, जिससे कुछ आरटीएसए ने बोर्ड के निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती भी दी है.

परंतु अब रेलमंत्री के इस नए निर्णय से न सिर्फ सभी आरटीएसए खुश हो गए हैं, बल्कि उनके करीब दस हजार कर्मचारी भी बेरोजगार होने से बच गए हैं. इसके अलावा करोड़ों रेल यात्रियों और जन-सामान्य द्वारा भी इस रेल टिकट बिक्री विकेंद्रीकरण योजना का चौतरफा स्वागत किया गया है. इससे अब उन्हें रेलवे के आरक्षण कार्यालयों और टिकट घरों पर लंबी लाइन लगाने से छुटकारा मिल जाएगा तथा उनके कीमती समय की भी बचत होगी. इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और उनके आसपास भीड़ भी नहीं होगी, जिससे लोगों की आवाजाही सुगम हो सकेगी.

दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान

‘नागरिक गरिमा - विधिक परिप्रेक्ष्य’ के संदर्भ में न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा का सारभूत उद्बोधन

दिल्ली हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिऐशन द्वारा आयोजित विधि व्याख्यान में पधारे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश माननीय श्री दीपक मिश्रा द्वारा भारतीय संविधान में लिखित प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए भारतीय नागरिकों की गरिमा विषय पर प्रकाश डाला गया. विधि व्याख्यान के विषय - ‘नागरिक गरिमा - विधिक परिप्रेक्ष्य’ के संदर्भ में उन्होंने भारतीय नागरिकों की तब और अब की स्थिति पर उनके हितार्थ बनाए गए विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी दी. इसी विषय के संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सबको सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है. इस संदर्भ में माननीय न्यायमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का भी उल्लेख भी किया.


कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया. हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार सोसिऐशन के पूर्व प्रतिनिधियों द्वारा मंचासीन अतिथियों का पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया गया. स्वागत समारोह के उपरांत कार्यक्रम के अध्यक्ष मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री ए. एम. खानविलकर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी नागरिकों की गरिमा की महत्ता को रेखांकित करते हुए अधिवक्ताओं के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में उपस्थित महाधिवक्ता श्री आर. डी. जैन भी उपस्थित थे. स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रामेश्वर नीखरा द्वारा भी विधि व्याख्यान के विषय पर जानकारी प्रस्तुत की गई.

एक बालक था, जिसका नाम था अरुण कुमार गुप्ता..

अरुणेंद्र कुमार का डीएनए टेस्ट करवाकर इनकी असली उम्र तय की जानी चाहिए
नौवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान अरुणेंद्र कुमार ने अपना नाम बदलने के साथ दो साल चार महीने कम करवाई थी अपनी उम्र

एक बालक था, जिसका नाम था ‘अरुण कुमार गुप्ता’.. जो कि बाद में ‘अरुणेंद्र कुमार’ बन गया.. हां, ये सच है कि आज के ‘अरुणेंद्र कुमार’ कभी ‘अरुण कुमार गुप्ता’ हुआ करते थे. ये पैदाइसी चालबाज रहे हैं, जो कि इनकी भीतरघाती गतिविधियों से आज तक जाहिर है. ये कुटिल और खुंदकी भी हैं, जिसे ये कभी जाहिर नहीं होने देते, मगर भीतरघाती प्रवृत्ति के चलते अपने विरोधियों अथवा अपने से इत्तिफाक न रखने वालों को बड़ी चालाकी से एक-एक करके दरकिनार करने में इन्हें बहुत बड़ी महारत हासिल है, जिसे इन्होंने सीआरबी बनने से पहले और उसके बाद बड़ी खूबी से अंजाम दिया है. जिसके तमाम उदाहरण अब तक लगभग सभी बोर्ड मेंबरों, बोर्ड के तमाम अधिकारियों और जोनल रेलों को मिल चुके हैं.

तो ये आज के ‘अरुणेंद्र कुमार’ कभी ‘अरुण कुमार गुप्ता’ हुआ करते थे. जी हां, ये सौ फीसदी सही है. इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. लखनऊ के सुप्रसिद्ध ‘काल्विन तालुकदार कॉलेज’ में पढ़ने वाले ‘अरुण कुमार गुप्ता’ ने नौवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान एक हलफनामा देकर अपना नाम बदलकर ‘अरुणेंद्र कुमार’ कर लिया था. यही नहीं, उसी समय इन्होंने अपनी उम्र भी दो साल चार महीने कम करवा ली थी. उसी की बदौलत आज ये रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बने बैठे हैं. यह काम इनके सम्माननीय माता-पिता ने करवाया था, जिनकी दूरंदेसी की वास्तव में दाद देनी होगी, कि उन्होंने अपनी व्यावसायिक चालाकी के सारे गुण-अवगुण भी अपने इस कुटिल बेटे के जेहन में तभी भर दिए थे, जिसकी बदौलत आज ये सीआरबी हैं.

असुरक्षित तथाकथित प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस

सुरेश त्रिपाठी

पिछले दिनों पश्चिम रेलवे की मुंबई राजधानी एक्सप्रेस में लगातार तीन दिन तक यात्रियों का समान चोरी हुआ. इस दौरान करीब पांच महिलाओं का समान चोरी हुआ. ज्यादा हंगामा तब मचा, जब चोरों ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक की पत्नी का ही समान उड़ा लिया, जो कि सामान्य यात्रियों की ही तरह राजधानी एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच में मुंबई से दिल्ली की यात्रा कर रही थीं. हालत ये है कि चोरों को उसी कोच में यात्रा कर रहे मुंबई मंडल, पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, रेलवे सुरक्षा बल की उपस्थिति का भी कोई खौफ नहीं रहा है. विडम्बना इस बात की है कि चोरों ने पूरी व्यवस्था को चुनौती देते हुए लगातार तीन दिन इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी में चोरी की, मगर उन्हें आज तक पकड़ा नहीं जा सका है. अब जब महाप्रबंधक की पत्नी खुद लुट गईं हैं, तो इस गाड़ी में सादी वर्दी में सुरक्षा स्टाफ को लगाए जाने का निर्णय लिया गया है.

इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी की बड़ी चर्चाएं होती हैं, मगर अन्य गाड़ियों की अपेक्षा दिल्ली जाने-आने के लिए इसके कम समय लेने के अलावा इसकी अन्य कोई खूबी नहीं है. फिर चाहे इसकी झटके खाती कपलिन की बात हो, या इसके रख-रखाव की बात हो, अथवा खानपान या कैटरिंग एवं कोच स्टाफ के व्यवहार की बात हो, या थर्ड एसी कोचों के यात्रियों को थर्ड क्लास खाना परोसे जाने और हाथ में पकड़ाए जाने वाले चाय/कॉफी के किट और थर्मस हों, कंबलों और लिनन से उठती धूल के तो क्या कहने? यानि इस तथाकथित प्रतिष्ठित गाड़ी में कोई एक ही कमी नहीं है. यह तो इनमें से कभी-कभी कोई एक कमी उछलकर बाहर आ जाती है, तो उसकी चर्चा हो जाती है. बाकी तो सब अपने ढ़र्रे पर चलता रहता है. यात्री भी तभी अपनी आवाज उठाते हैं जब किसी बात की अति हो जाती है और उनकी सहनशीलता जवाब दे जाती है.

रेलमंत्री द्वारा आईआरसीटीसी के चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन

आईआरसीटीसी की रेल नीर उत्पादन क्षमता हुई सवा छह लाख बोतल प्रतिदिन

भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम लि. (आईआरसीटीसी) के मुंबई स्थित चौथे ‘रेल-नीर’ संयंत्र का उदघाटन बुधवार, 13 अगस्त को रेलमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा द्वारा रिमोट के जरिए रेल भवन, दिल्ली से किया गया. इस अवसर पर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैफिक देवीप्रसाद पांडेय सहित आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक एवं अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. आईआरसीटीसी का आधुनिक तकनीक से सुसज्ज यह चौथा ‘रेल-नीर’ संयंत्र मुंबई से करीब 65 किमी. दूर ठाणे जिले के अंबरनाथ में स्थित है. कुल करीब 23.50 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 2 लाख बोतल बंद पानी की है.

आईआरसीटीसी के इस नए और चौथे रेल-नीर संयंत्र की उत्पादन क्षमता इसके पहले के तीनों संयंत्रो से ज्यादा है. उल्लेखनीय है कि आईआरसीटीसी का पहला संयंत्र दिल्ली के पास नांगलोई में वर्ष 2003 में शुरू हुआ था. इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1.30 लाख बोतल की है. इसका दूसरा संयंत्र पटना के पास दानापुर में वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1 लाख बोतलों की है. जबकि इसका तीसरा संयंत्र चेन्नई के पास पालूर में स्थित है. यह वर्ष 2011 में शुरू हुआ था और इसकी प्रतिदिन उत्पादन क्षमता 1.80 लाख बोतलों की है. आईआरसीटीसी द्वारा मुंबई के पास अंबरनाथ में शुरू किए गए अपने इस चौथे संयंत्र से मध्य एवं पश्चिम रेलवे के मुंबई सहित पुणे, सोलापुर और नासिक जिलों तक के रेलवे स्टेशनों पर रेल नीर ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण बोतल-बंद पानी की आपूर्ति की जाएगी. इससे स्थानीय और लोकल ब्रांड के गैर-गुणवत्तापूर्ण बोतल-बंद पानी से यात्री को काफी हद तक छुटकारा मिलेगा.

पूर्व रेलवे का कार्य-निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर -आर.के.गुप्ता

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक आर. के. गुप्ता ने पूर्व रेलवे मुख्यालय, फेयरली प्लेस, कोलकाता पर 68वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद सभी रेलकर्मियों, उनके परिजनों तथा रेल उपभोगकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूर्व रेलवे ने चालू वित्तवर्ष के पहले तीन महीनों के निर्धारित माल लोडिंग के लक्ष्य को पार करके बेहतर कार्य-निष्पादन का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि यात्रियों परिवहन के मामले में भी पूर्व रेलवे अपने काम को बेहतरीन तरीके से अंजाम देकर राष्ट्र की आर्थिक तथा औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार माह में भी पूर्व रेलवे का कार्य निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में काफी अच्छा है.

इस अवसर पर श्री गुप्ता ने कहा कि पूर्व रेलवे ने चालू वर्ष के लिए तय लक्ष्य 15.660 मिलियन टन को पार करके अप्रैल से जून 2014 की पहली तिमाही के दौरान कुल 16.172 मिलयन टन की फ्रेट रेवेन्यु लोडिंग दर्ज की है. गत वर्ष की समान अवधि में यह कुल 14.046 मिलियन टन थी. इस प्रकार पूर्व रेलवे ने गत वर्ष की तुलना में पहली ही तिमाही में 15.14% की वृद्धि हासिल की है. इस अवधि में पूर्व रेलवे की कोयला लोडिंग 11.07 मिलियन टन रही है. जो कि गत वर्ष की समान अवधि में 9.315 मिलियन टन थी.

पश्चिम रेलवे द्वारा माल लदान, आमदनी बढ़ाने तथा यात्री सुविधाओं पर जोर

68वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर चर्चगेट स्थित प्रधान कार्यालय में आयोजित समारोह में पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने ध्वजारोहण किया. इस अवसर पर आरपीएफ परेड का निरीक्षण किया और मार्चपास्ट की सलामी ली. रेलकर्मियों एवं उनके परिवारों को शुभकामनाएँ देते हुए महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाले पश्चिम रेलवे के खिलाड़ियों को उनकी सफलता पर बधाई दी. महाप्रबंधक हेमंत कुमार ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों के दौरान पश्चिम रेलवे पर 26 मिलियन टन से भी अधिक माल का लदान हुआ है, इसी अवधि में प्रारम्भिक माल आमदनी लगभग 3517 करोड़ रु. रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है. जुलाई, 2014 तक कुल प्रारम्भिक आमदनी 5100 करोड़ रु. से अधिक रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत ज़्यादा है. चालू वर्ष के दौरान लैंड रिसोर्सेज से लगभग 38 करोड़ रु. प्राप्त हुए, जो लक्ष्य की तुलना में 200 प्रतिशत से भी अधिक हैं.

उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के दौरान पश्चिम रेलवे में मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का समयपालन लगभग 97 प्रतिशत रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में प.रे. द्वारा 6531 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जो 2012-13 की तुलना में 106 प्रतिशत अधिक हैं. इस वर्ष के बजट में पश्चिम रेलवे पर 34 नई ट्रेनें घोषित की गई हैं. इनमे से अब तक 3 ट्रेनें शुरू की गई हैं. साथ ही 2059 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं. अस्थायी अथवा दैनिक आधार पर विभिन्न ट्रेनों में 3300 से अधिक अतिरिक्त डिब्बे जोड़े गए, जिनके फलस्वरूप लगभग 2 लाख 55 हज़ार अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध कराई गई हैं. इस वर्ष 7 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है.

चालू वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में बढ़िया रहा है म. रे. का कार्य-निष्पादन

68वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को महाप्रबंधक सुनील कुमार सूद ने मध्य रेलवे मुख्यालय, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर ध्वजारोहण के बाद सभी रेलकर्मियों, उनके परिजनों तथा लाखों रेल उपभोगकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्य रेल माल एवं यात्रियों परिवहन को दक्षतापूर्ण एवं किफायती तरीके से अंजाम देकर राष्ट्र की आर्थिक तथा औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार माह में म.रे. का कार्य निष्पादन पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर रहा है. इस दौरान कुल प्रारंभिक अर्जन 2980 करोड़ रु. से बढ़कर 3472 करोड़ रु. हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 16% अधिक है. इसी तरह कुल प्रभाजित अर्जन 3331 करोड़ रु. से बढ़कर 3792 करोड़ रु. हुआ, जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14% अधिक है.

उन्होंने कहा कि चालू वर्ष के पहले चार महीनों में प्रारंभिक फ्रेट लोडिंग 17.31 मिलियन टन से बढ़कर 19.21 मिलियन टन हुई है, जो कि पिछले वर्ष से 11 तथा 18.35  मिलियन टन के लक्ष्य से 4.7% अधिक है. इस अवधि में 179 वीपी रेकों को लोड किया गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 101 रेकों को लोड किया गया था. चालू वित्तीय वर्ष में टिकट जांच अर्जन 34 करोड़ से बढ़कर 39 करोड़ रु. हुआ, जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14% अधिक है. उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में 67 करोड़ रु. के स्कैप की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 47 करोड़ रु. के स्क्रैप की बिक्री की गई थी. इस मद में 44% की बढ़ोतरी हुई है. म.रे. ने 2013-14 के रेल बजट में की गई घोषणा के अनुसार लंबी दूरी की गाड़ियां भी चलाई हैं.

पश्चिम मध्य रेल ने उल्लासपूर्वक मनाया स्वतंत्रता दिवस समारोह

पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक रमेश चन्द्रा ने 68वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को सुबह 8 बजे स्थानीय रेलवे स्टेडियम में ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के पश्चात् आरपीएफ परेड की सलामी ली. इस समारोह में रेल सुरक्षा बल के जवान, सेंट जोन्स एम्बुलेंस ब्रिगेड के सदस्य, स्काउट एवं गाइडस तथा रेलवे स्कूल के बच्चे और बड़ी संख्या में रेल अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे. इस मौके पर महाप्रबंधक ने अपना संदेश पढ़कर सभी उपस्थितो को सुनाया.


महाप्रबंधक ने राष्ट्र के प्रति समर्पण भावना रखने और सभी कर्मचारियों से देश के प्रति समर्पित होने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्हें पश्चिम मध्य रेल की उपलब्धियों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में प.म.रे. ने कई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है. वर्ष 2013-14 में प.म.रे. का आपरेटिंग रेशियो लगभग 70% रहा, जो कि भारतीय रेल के औसत आपरेटिंग रेशियो से बेहतर है. गत वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में माल यातायात आय में 8.8%, यात्री भाड़ा आय में 14% तथा यात्रियों की संख्या में 4.2% की वृद्धि दर्ज की गई. जबकि प.म.रे. की टिकिट चेकिंग आय में लगभग 19% की वृद्धि हुई है.

आईआरपीएस अधिकारी राकेश कुमार को 70 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा

इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस (आईआरपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी राकेश कुमार को सीबीआई ने 70 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में पकड़ा है. राकेश कुमार फिलहाल सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी-सेंसर बोर्ड) के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) हैं. इससे पहले वह मध्य रेलवे, मुंबई मंडल और पश्चिम रेलवे, वड़ोदरा मंडल में सीनियर डीपीओ रहे हैं. इसी साल वह जनवरी में सीबीएफसी में सीईओ के पद पर रेलवे से प्रतिनियुक्ति पर गए थे.

प्राप्त जानकारी के अनुसार राकेश कुमार ने छत्तीसगढ़ की एक क्षेत्रीय फिल्म ‘मोर धौकी के बिवाह’ का सेंसर सर्टिफिकेट देने के लिए सेंसर बोर्ड के सर्टिफाइड एजेंट श्रीपति मिश्रा के माध्यम से राकेश कुमार ने कथित रूप से 70 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी. सूत्रों का कहना है कि इस बात की शिकायत एक अन्य अधिकृत एजेंट ने सीबीआई से की थी. सीबीआई ने इस शिकायत पर ट्रैप लगाया और श्रीपति मिश्रा एवं सलाहकार पैनल के एक सदस्य सर्वेश जायसवाल को गिरफ्तार किया है.

खबर लिखे जाने तक सीबीआई द्वारा राकेश कुमार एवं मिश्रा और जायसवाल के घर और ऑफिस की सर्च की जा रही थी. सूत्रों का कहना है कि फिल्म के प्रोडूसर को अपनी फिल्म 15 अगस्त को थियेटर्स में रिलीज करनी थी. इसलिए उसे फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट पाने की जल्दी थी. इसीलिए उसने सीबीएफसी के एक अधिकृत एजेंट को इसके लिए नियुक्त किया था. इसी अधिकृत एजेंट से सर्टिफाइड एजेंट श्रीपति मिश्रा ने राकेश कुमार के नाम पर 70 हजार की रिश्वत की मांग की थी.

आईआरसीटीसी के पूर्व सीआरएम के. एम. त्रिपाठी को पांच साल की जेल

आईआरसीटीसी के पूर्व सीआरएम के. एम. त्रिपाठी को भ्रष्टाचार निरोधक लखनऊ की विशेष अदालत के विशेष जज राजेंद्र सिंह ने यहां सोमवार, 12 अगस्त को पांच साल के कठोर कारावास की सजा और 90 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें एक साल और जेल में बिताना पड़ेगा. इस फैसले के बाद उन्हें गिरफ्तार करके तुरंत जेल भेज दिया गया है. जबकि उनके सहायक रहे स्टेशन अफसर अजय कुमार श्रीवास्तव को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. करीब 6 साल पहले 30 अक्टूबर 2010 को सीबीआई ने त्रिपाठी को 70 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था.

पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद लखनऊ की विशेष अदालत से बाहर आते हुए के. एम. त्रिपाठी

विशेष जज राजेंद्र सिंह ने के. एम. त्रिपाठी के खिलाफ अपना निर्णय सुनाते हुए अदालत के फैसले में कहा कि प्रतिवादी के खिलाफ दस्तावेजी सबूतों और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर लगाए गए आरोप सही साबित हुए है. प्रतिवादी ऐसे कोई साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाया, जो कि उसके निर्दोष होने की तरफ इशारा करते हों. जबकि सीबीआई इस मामले में दूसरे आरोपी अजय कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ अपने आरोपों को पुख्ता तौर पर संदेह से परे साबित नहीं कर पाई है. इसलिए श्रीवास्तव को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है.

इस मामले में शिकायतकर्ता बस्ती निवासी सुनील कुमार सिंह ने 30 अक्टूबर 2009 को सीबीआई, लखनऊ को एक लिखित शिकायत देते हुए कहा था कि वह आईआरसीटीसी का अधिकृत लाइसेंसी ठेकेदार है. वह बस्ती और खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर अमित कूल कॉर्नर नाम से एक स्टाल और ट्राली चलाता है. इनका नवीनीकरण होना है. इस सिलसिले में वह स्टेशन अफसर अजय कुमार श्रीवास्तव से 29 अक्टूबर 2009 को उनके कार्यालय में मिला था, जहां श्रीवास्तव ने उससे 70 हजार रुपए देने के बाद ही नवीनीकरण हो सकता है, यह कहकर उसे के. एम. त्रिपाठी से मिलने को कहा था. इसके अगले दिन 30 अक्टूबर को सुनील सिंह से 70 हजार नकद लेते हुए सीबीआई ने त्रिपाठी को उनके महात्मा गांधी मार्ग, लखनऊ स्थित आवास से रंगेहाथ गिरफ्तार किया था.

‘फतेली’ रेलवे कॉलोनी की ‘फटी’ हालत के चलते रेल आवास छोड़ने को मजबूर रेलकर्मी

वैसे तो पूरी भारतीय रेल में रेलवे आवासों की स्थिति बहुत दयनीय है. परंतु कुछ आपातकालीन स्टाफ को इन आवासों में रहना उनकी मज़बूरी है. इस मद में हर साल रेल बजट में करोड़ों रुपए की निधि आवंटित की जाती है, मगर उसे अन्य मदों में खर्च करके रेलवे आवासों और रेलकर्मियों की दुर्दशा पर रेल प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यही स्थिति लखनऊ मंडल, उत्तर रेलवे के कानपूर रोड स्थित ‘फतेली’ रेलवे कॉलोनी की भी है जहां के सभी रेलवे आवास पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं. परिणामस्वरूप यहाँ के रेलकर्मी अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए इन भारी दुर्दशाग्रस्त रेल आवासों को छोड़कर जा रहे है और अन्यत्र रहने को मजबूर हो रहे हैं.


‘फतेली’ रेलवे कॉलोनी की ‘फटी’ हालत के चलते अधिकांश रेलकर्मी यहां से अपने आवास छोड़कर जा चुके हैं, जबकि मजबूरन अब तक यहां टिके कुछ रेलकर्मियों का कहना है कि उनके आवास अंदर-बाहर दोनों तरफ से पूरी तरह ख़राब हो चुके हैं. कई बार लिखित शिकायतें किए जाने के बावजूद रेल प्रशासन द्वारा इन आवासों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है. उनका यह भी कहना है कि यहां सुरक्षा का कोई बंदोबस्त न होने से आए दिन चोरियां और लूटपाट होती रहती है. यहां पानी आपूर्ति की भी भारी समस्या है. रेलकर्मियों का कहना है कि यहां कई बार दिनभर में एक घंटे के लिए भी पानी नहीं आता है.

उत्तर मध्य रेलवे परिक्षेत्र में रेलवे क्रासिंग पर नियुक्त होंगे गेट-मित्र

गेट-मित्र योजना के अमल में आने से बहुत सी कीमती जिंदगियों को बचाने और रेल दुर्घटनाओं को रोक पाने में सक्षम हो सकेंगे –प्रदीप कुमार, जीएम/उ.म.रे.
गेट-मित्रों की नियुक्ति के लिए जारी की जाएगी निविदा
मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स पर पूर्व सैनिकों को ही नियुक्त किया जाएगा

मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर होने वाली दुर्घटनाएं रेल प्रशासन के लिए भारी चिंता का विषय रही हैं. हालांकि रेल प्रशासन इस समस्‍या से निपटने के लिए तत्पर रहता है. तथापि संसाधनों की कमी के चलते उसे इस समस्या से निपटने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अब इस संबंध में महाप्रबंधक, उत्‍तर मध्‍य रेलवे प्रदीप कुमार ने अपने तीनों मंडलों – इलाहाबाद, झांसी और आगरा - के मंडल रेल प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं सड़क उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने हेतु गेट काउंसलर/गेट मित्रों की नियुक्ति की जाए, जिससे मानव रहित रेलवे क्रासिंग का उपयोग करने वाले लोगों को रेलवे क्रासिंग पर बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक कर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके.

महाप्रबंधक ने गेट काउंसलर/गेट मित्रों की नियुक्ति के कार्य को जल्दी से जल्दी पूरा करने के भी निर्देश दिए हैं. रेलवे के प्रयासों के परिणामस्‍वरूप मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स पर होने वाली दुर्घटनाओं में पिछले 10 वर्षों में लगातार कमी आई है. इस संदर्भ में यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल में परिणामी रेल दुर्घटनाएं वर्ष 2003-04 में 325 से घटकर वर्ष 2013-14 में 117 हो गईं, यानि प्रति दस लाख रेल किमी. में होने वाली दुर्घटनाएं वर्ष 2003-04 में 0.41 से घटकर वर्ष 2012-13 में 0.13 हो गईं हैं, जबकि इस दौरान यात्री और माल गाड़ियों की संख्‍या में अत्‍यधिक बढ़ोत्तरी हुई है. तथापि मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स पर होने वाली दुर्घटनाओं का अनुपात कुल होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे अधिक है. पिछले वर्ष होने वाली दुर्घटनाओं में 43 प्रतिशत दुर्घटनाएं रेलवे क्रासिंग्स पर ही हुई हैं, जिनमें से 39.3 प्रतिशत दुर्घटनाएं मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स पर हुई हैं.

एसी चैम्बर्स में बैठे अपात्र अधिकारी लगा रहे हैं रेलवे को लाखों का चूना

उत्तर रेलवे, फिरोजपुर मंडल कार्यालय में जूनियर एवं अपात्र अधिकारियों के चैंबर में अनधिकृत रूप से एयरकंडीशनर (एसी) लगाने का मामला तूल पकड़ने लगा है. अनधिकृत रूप से अपात्र अयोग्य अधिकारियों के चैम्बर्स में एसी लगाकर यहाँ कई अधिकारियों द्वारा रेलवे को प्रतिमाह लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है. यही नहीं विंडो-एसी लगने से कॉरिडोर में चपरासियों को भी बैठने में भारी परेशानी हो रही है. एसी से निकलने वाली गर्मी और खतरनाक गैस के कारण उन्हें अधिकारियों के चैंबर के बाहर बैठाना मुश्किल हो रहा है. बताते हैं कि फिरोजपुर मंडल में ऐसे करीब 15-16 अधिकारी हैं, जिनके चैम्बर्स में एसी लगाया जाना नियमों के खिलाफ है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन दिन पहले ही मंडल कार्यालय में सीनियर डिवीजनल इलेक्ट्रिकइंजीनियर/जनरल सुनील कुमार ने जूनियर अधिकारी डीईएन/जी अमरीक सिंह, डीईएन (हैड क्वार्टर) सुशील कुमार, डीईई/जी बी. सी. आजाद, डीसीएम तरलोक सिंह, डीएफएम उमेश मैनी और डीपीओ पी. के. शर्मा समेत करीब 15 अपात्र अधिकारियों के चैंबर में अनधिकृत रूप से एसी लगाए गए हैं. नियमानुसार इन अधिकारियों के चैंबर में एसी नहीं लगाए जा सकते हैं. ऐसा करके वास्तव में ये अधिकारी अथवा विद्युत् विभाग के सम्बंधित गैर-जिम्मेदार अधिकारी रेलवे को लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं, जिससे मंडल में बिजली की खपत बढ़ गई है. रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (जी) संजय कुब्बा द्वारा जारी किए सर्कुलर (रेलवे बोर्ड लेटर नंबर 2002/इलेक्ट्रिकल(जी)/115/1, दि. 21.09.2004 और समसंख्यक पत्र दि. 19.05.2005) के मुताबिक जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड एवं सिलेक्शन ग्रेड (जेएजी/एसजी) सहित ऊपर के अधिकारियों के चैंबर में ही एसी लग सकते हैं.

फैजाबाद रेलवे स्टेशन की बहाल हुई सफाई व्यवस्था

अधिकारियों ने कराया ठेकेदार और रंगदारी वसूलने वाले सपा नेता के बीच समझौता

उत्तर प्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी प्रदेश में आए दिन हत्या-बलात्कार के मामलों को लेकर बुरी तरह से बदनाम हो ही रही है. परंतु अब बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ठेकेदारों और दूकानदारों से सत्तारूढ़ पार्टी के छोटे-बड़े नेता रंगदारी वसूलने का ‘व्यवसाय’ भी शुरू कर चुके हैं. इसी के चलते पिछले करीब एक माह से फैजाबाद स्टेशन की साफ-सफाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार के आदमियों को प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के एक स्थानीय नेता के लोगों द्वारा परेशान किया जा रहा था. बताते हैं कि इससे पहले ठेकेदार के पास नेता का संदेश पहुंचाया गया था, कि नेता जी को रंगदारी की एक निश्चित राशि पहुंचा दी जाए, वरना उसका यहां काम करना मुश्किल हो जाएगा.


प्राप्त जानकारी के अनुसार ठेकेदार ने उसकी बात पर जब ध्यान नहीं दिया, तो स्थानीय नेता के लोग रोज स्टेशन पर जाकर उसके सफाईकर्मियों को मारने पीटने और धमकाने लगे. इससे तंग आकर ठेकेदार ने स्टेशन की सफाई का काम बंद कर दिया और अपने सभी आदमी भी वहां से हटा लिया. ठेकेदार के इस तरह अचानक काम बंद कर दिए जाने से स्टेशन पर गंदगी की समस्या पैदा हो गई, उस पर जले में खाज की तरह इसी दरम्यान इसी विषय पर ‘कान्तारू’ का वाराणसी भ्रमण भी प्रायोजित था. इसके अलावा सावन महीना होने से इस पूरे क्षेत्र में मेलों के चलते रेलवे स्टेशनों पर पब्लिक की भारी आवाजाही के कारण गंदगी भी बहुत हो रही थी. इससे लखनऊ मंडल उत्तर रेलवे के अधिकारियों का हड़बड़ा जाना स्वाभाविक था, क्योंकि सफाईकर्मी के नाम पर विभाग के पास एक भी आदमी नहीं थे. उन्हें दिहाड़ी पर मजदूर बुलाकर स्टेशन की सफाई करानी पड़ रही थी.

जीएम पैनल और एमएल की नियुक्ति का फिलहाल कोई पता नहीं

सुरेश त्रिपाठी

सीआरबी से विजिलेंस का चार्ज वापस लेकर उसे पूर्ववत मेंबर स्टाफ को सौंपा जाना चाहिए
सीआरबी की नियुक्ति और उनकी समस्त संदिग्ध गतिविधियों तथा तमाम मुंह-जबानी आदेशों की जांच करवाई जानी चाहिए

वर्ष 2013-14 का जीएम पैनल 31 मार्च को खत्म होने के बाद चार महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक वर्ष 2014-15 के नए जीएम पैनल का कुछ अता-पता नहीं है. रेलवे बोर्ड के हमारे विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि अभी तक नए जीएम पैनल के लिए अधिकारियों के नामों का ही निर्धारण नहीं हो पाया है. ऐसे में डीओपीटी से नया पैनल फाइनल होकर आने में अभी काफी समय लग सकता है. पहले यह कहा जा रहा था कि रेल बजट के फौरन बाद रेलवे बोर्ड इस मामले में तत्परता दिखाएगा, परंतु रेलवे बोर्ड में चल रही आपसी खींचतान और सीआरबी को कथित तौर पर साइड लाइन किए जाने से जीएम पैनल अटका हुआ है. रेलवे बोर्ड के तमाम अधिकारियों को इस बात का आश्चर्य है कि जीएम पैनल अथवा कोई भी पैनल बनाए और भेजे जाने में इतनी ज्यादा गोपनीयता क्यों बरती जाती है?

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में उत्तर रेलवे, दिल्ली, रेल व्हील फैक्ट्री, बंगलौर, डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी और मेट्रो रेलवे, कोलकाता के जीएम के चार पद खाली हैं. इनमे से मेट्रो रेलवे को तो करीब तीन साल से कोई स्थाई जीएम ही नहीं मिल पाया है. यह कथित ओपन लाइन और तथाकथित जोन भारतीय रेल में एक मजाक बनकर रह गया है. अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि इसके विस्तार की चल रही हजारों करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं में रेलवे बोर्ड सीधे अपनी ‘हिस्सेदारी’ लेने के चलते ही कहीं इसका कोई जीएम नियुक्त नहीं होने दे रहा है? वी. के. गुप्ता के बोर्ड में मेंबर इंजीनियरिंग बन जाने से उत्तर रेलवे की जीएम पोस्ट खाली हुई है, जबकि आरडब्ल्यूएफ और डीएलडब्ल्यू से क्रमशः राजीव भार्गव और बी. पी. खरे के सेवानिवृत्त होने से यह पद खाली हुए हैं.

रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारी, मोदी सरकार का सराहनीय प्रयास

सुरेश त्रिपाठी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भारतीय रेल की हालत में आमूल-चूल सुधार किए जाने की कोशिश चल रही है. इसके अंतर्गत रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन प्रस्तावित है, जिसका जिक्र रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने 8 जुलाई को संसद में प्रस्तुत अपने रेल बजट में भी किया है. यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान रेलवे बोर्ड की नौकरशाही एकदम बेलगाम हो गई थी, और वह वही कर रही थी, जो उसके राजनीतिक आका कह रहे थे, जिसमें रेलवे का हित या विकास शामिल नहीं होता था. इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण वर्तमान सीआरबी खुद हैं, जो अपने कांग्रेसी आका की बदौलत एक निहायत ईमानदार अधिकारी को दरकिनार करके यहां तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं. इसके चलते जिस तरह रेलवे बोर्ड और भारतीय रेलों को मनमानी, पक्षपात, विभागवाद और भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है, उसे देखते हुए एक न एक दिन तो ऐसा होना ही था.

वर्तमान सीआरबी से पहले भी ऐसा ही होता रहा है और राजनीतिज्ञों की पसंद से ही भारतीय रेल के सर्वोच्च पद पर किसी न किसी चोर, चापलूस और चरित्रहीन नौकरशाह को बैठाया जाता रहा है, जिसके चलते आज भारतीय रेलों की यह दुर्दशा हो रही है और नौबत यहां तक आ पहुंची है कि इसकी कोच/वैगन निर्माण और कई अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों का निजीकरण करने सहित विदेशों से भीख मांगने की नौबत आ गई है और विदेशी पूंजी निवेश को आमंत्रित करना पड़ रहा है. भारतीय रेलों और रेलवे बोर्ड में भ्रष्टाचार तो चरम पर है ही, मगर इसमें खासतौर पर हावी विभागवाद ने रेलों की दुर्दशा को गर्त में पहुंचा दिया है. रेलों में खानपान की व्यवस्था हो, साफ-सफाई की बात हो, सुरक्षा-संरक्षा का मामला हो, समयपालन और आय का मुद्दा हो, सब तरफ से भारतीय रेलें कुव्यवस्था और कुप्रशासन का शिकार हैं. रेलवे के वर्तमान सीआरबी जैसे चापलूस नौकरशाहों के चलते ये सामान्य बंदोबस्त भी रेलवे के करोड़ों उपभोक्ताओं को मुहैया नहीं कराए जा सके हैं.

फिरोजपुर मंडल : स्टोर्स के टेंडरों पर लग रही हैं डिस्पैच की नकली मोहरें

लोकल परचेज के टेंडरों में करोड़ो का घोटाला, रेलमंत्री और एसडीजीएम को सबूतों के साथ भेजी गई लिखित शिकायत, जांच की मांग
उत्तर रेलवे, फिरोजपुर मंडल के स्टोर विभाग में लोकल परचेज के लिए होने वाले टेंडरों पर डिस्पैच ब्रांच की नकली मोहरें लगाकर चुनिंदा फर्मों को टेंडर दिए जाने का मामला सामने आया है. बताया जाता है कि इसमें लाखों-करोड़ों रुपये का घोटाला है. पिछले एक साल में इलेक्ट्रिकल विभाग की एक ही आइटम ‘फ्यूज’ की धड़ल्ले से खरीद की जा रही है. कथित तौर पर उक्त आइटम संबंधित विभागों को सप्लाई नहीं की जाती है, जबकि बिल लाखों रुपये के पास हो रहे हैं. इस संबंध में मंडल में अधिकृत सप्लायर के रूप में पंजीकृत चार फर्मों के सप्लायर्स (ठेकेदारों) ने रेलमंत्री सदानंद गौड़ा और उत्तर रेलवे के वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी (एसडीजीएम/सीवीओ) रंजनेश सहाय को लिखित शिकायत भेजकर उक्त मामले की गहन जांच की मांग की है. ठेकेदारों द्वारा की गई इस लिखित शिकायत की प्रति ‘रेलवे समाचार’ के पास मौजूद है.


इस संदर्भ में सम्बंधित ठेकेदारों ने बताया कि स्टोर विभाग के अधिकारी सीनियर डीएमएम से सूचना अधिकार के तहत टेंडरों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने सही जानकारी नहीं दी. उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिकल विभाग में ट्रेनों में लगने वाले फ्यूज की ही परचेज हो रही है और इसमें लाखों रुपये का घोटाला हुआ है. स्टोर विभाग का प्रतिमाह 16 लाख रुपये की लोकल परचेज का लक्ष्य है. उक्त ग्रांट में से 14 लाख रुपए की सिर्फ इलेक्ट्रिकल विभाग के पुर्जों की ही खरीद हुई है और बाकी विभागों का सामान नहीं खरीदा जा रहा है.

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