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सीनियर डीसीएम मनोज कुमार सिंह के निलंबन का कोई औचित्य नहीं था !    ||    एक्सटेंशन अथवा पोस्ट रिटायरमेंट रि-प्लेसमेंट की जुगत भिड़ा रहे हैं अरुणेंद्र कुमार    ||    वसूली और बचाव में सहायक रहे द.पू.म.रे. के ‘पांच पांडवों’ को करवाया विदेश भ्रमण    ||    रेलवे ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में रहता है अधिकारी का बंगला प्यून    ||    अवास्तविक दरों पर ट्रकों की हायरिंग, जमकर लग रहा है रेलवे रेवेन्यु को चूना    ||    व्हाट्स ऐन आईडिया सर जी..!    ||    उ.म.रे. को प्रतिष्ठित सिविल, मैकेनिकल एवं स्टोर्स शील्‍ड मिलने पर भारी खुशी    ||    महाप्रबंधक ने जारी किया पूर्व रेलवे का समेकित आपदा प्रबंधन कार्यक्रम    ||    श्रीमती राजलक्ष्मी रविकुमार बनीं फाइनेंस कमिश्नर/रेलवेज    ||    किस-किस को प्रतिबंधित करेंगे अरुणेंद्र कुमार?    ||    ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ रेल अधिकारियों के बीच प्रमोशन एवं पोस्टों को लेकर बहस    ||    एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका    ||    रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा    ||    ‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे    ||    नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !    ||    रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम    ||    यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट    ||    एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस    ||    आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा    ||    2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत

Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact:+919869256875 Email : editor@railsamachar.com, railwaysamachar@gmail.com

सीनियर डीसीएम मनोज कुमार सिंह के निलंबन का कोई औचित्य नहीं था !    ||    एक्सटेंशन अथवा पोस्ट रिटायरमेंट रि-प्लेसमेंट की जुगत भिड़ा रहे हैं अरुणेंद्र कुमार    ||    वसूली और बचाव में सहायक रहे द.पू.म.रे. के ‘पांच पांडवों’ को करवाया विदेश भ्रमण    ||    रेलवे ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में रहता है अधिकारी का बंगला प्यून    ||    अवास्तविक दरों पर ट्रकों की हायरिंग, जमकर लग रहा है रेलवे रेवेन्यु को चूना    ||    व्हाट्स ऐन आईडिया सर जी..!    ||    उ.म.रे. को प्रतिष्ठित सिविल, मैकेनिकल एवं स्टोर्स शील्‍ड मिलने पर भारी खुशी    ||    महाप्रबंधक ने जारी किया पूर्व रेलवे का समेकित आपदा प्रबंधन कार्यक्रम    ||    श्रीमती राजलक्ष्मी रविकुमार बनीं फाइनेंस कमिश्नर/रेलवेज    ||    किस-किस को प्रतिबंधित करेंगे अरुणेंद्र कुमार?    ||    ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ रेल अधिकारियों के बीच प्रमोशन एवं पोस्टों को लेकर बहस    ||    एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका    ||    रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा    ||    ‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे    ||    नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !    ||    रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम    ||    यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट    ||    एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस    ||    आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा    ||    2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत

Headlines :
सीनियर डीसीएम मनोज कुमार सिंह के निलंबन का कोई औचित्य नहीं था !

सीसीएम को थी मामले की पूरी जानकारी, फिर भी जीएम के समक्ष अपने मातहत का नहीं कर सके बचाव
तीन-चार महीनों तक नहीं दिया जाता रहा है हिसाब, फिर भी कोई निलंबन नहीं हुआ, तो आज क्यों?
जीएम पर पक्षपात करने का आरोप, वस्तुस्थिति जाने बिना किया सीनियर डीसीएम का निलंबन

दिल्ली में डायरेक्टर/कोचिंग, रेलवे बोर्ड रवि मोहन शर्मा को एक टूर ऑपरेटर से पांच लाख की रिश्वत लेते हुए सीबीआई द्वारा 22 अक्टूबर को रंगेहाथ पकडे जाने की दहशत सुदूर पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के जीएम और सीसीएम पर इतनी ज्यादा हावी हुई कि उन्होंने उसी दिन किसी तर्कसंगत कारण के बिना ही लखनऊ मंडल के सीनियर डीसीएम मनोज कुमार सिंह को रेलवे के 30 लाख रुपए की कथित हेराफेरी के आरोप में निलंबित करके उनकी तमाम इज्जत को कुछ ही पलों में मिट्टी में मिला दिया. जबकि दुर्घटनाग्रस्तों को आपातकालीन मदद के लिए रेलवे कोचिंग से निकाला गया उक्त पैसा रेलवे के खाते में वापस जमा हो चुका था. सीसीएम तो अपने मातहत का बचाव कर नहीं पाए, जबकि कथित तत्परता दिखाने वाले जीएम को वस्तुस्थिति जानने की कुछ नहीं पड़ी थी. ऐसे में बिना वस्तुस्थिति जाने सीनियर डीसीएम के निलंबन का कोई औचित्य नहीं था. यह प्रशासनिक मनमानी और उत्तरदायित्वविहीनता का सबसे ज्वलंत उदाहरण है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में हुई दुर्घटना के घायलों और मृतकों के आश्रितों को अनुदान और मदद के लिए यह राशि रेलवे कोचिंग से निकलने का आदेश सीनियर डीसीएम मनोज सिंह ने उच्चाधिकारियों की सहमति से तब दिया था, जब रेल राज्यमंत्री हाल ही में लखनऊ आए थे. पता चला है कि मृतकों में से चार के आश्रितों को अब तक मदद नहीं पहुंच पाई थी, क्योंकि उनकी पहचान काफी देर से हुई थी. मंत्री के एयरपोर्ट निकलते ही एक डीसीआई ने करीब 15 लाख रुपए तुरंत रेलवे के खाते में जमा कर दिए थे, जबकि दूसरे डीसीआई की ड्यूटी मंत्री के प्रोटोकॉल में लगी होने और उसके तुरंत बाद एक मृतक के आश्रितों को चेक देने पश्चिम बंगाल चले जाने से उसके पास का हिसाब दो दिन बाद जमा हुआ. मगर किसी प्रकार भी एक पैसे की कोई हेराफेरी नहीं हुई है. मनोज कुमार सिंह के निलंबन को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इस बात की पुष्टि खुद कई अधिकारियों ने की है.

एक्सटेंशन अथवा पोस्ट रिटायरमेंट रि-प्लेसमेंट की जुगत भिड़ा रहे हैं अरुणेंद्र कुमार

सुरेश त्रिपाठी

रिटायरमेंट में दो महीने बाकी रहते शुरू हो गया है जोरदार उगाही कार्यक्रम
सीआरबी से विजिलेंस का चार्ज वापस नहीं लिए जाने से विजिलेंस मामलों में कायम है भारी विसंगति
संभव नहीं हो पा रही सीआरबी की संदिग्ध गतिविधियों और मुंह-जबानी आदेशों की जांच

वर्तमान चेयरमैन, रेलवे बोर्ड (सीआरबी) अरुणेंद्र कुमार और उनकी ‘एकमेव पत्नी’ कांताबाई ने अपनी ऊल-जलूल और परपीड़क हरकतों के चलते जिस तरह पूरी भारतीय रेल में गंध मचाई है, वैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ था. अब तो हालात यह हो गए हैं कि रेलवे बोर्ड और जोनों के तमाम अधिकारी तथा खासतौर पर सीआरबी सेल के लोग इनसे बेहतर विवेक सहाय को बताने लगे हैं. सर्वाधिक उपयुक्त अधिकारी को बायपास करके परमानेंट सीआरबी बनने में कामयाब होने के बाद जिस तरह से अरुणेंद्र कुमार ने पूरे रेलवे बोर्ड को निष्क्रिय कर दिया, जिस तरह एक-एक करके सभी बोर्ड मेंबर्स को दरकिनार किया, जिस तरह एकाध को छोड़कर सभी जोनों और उत्पादन इकाईयों के महाप्रबंधकों और तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को बकरी बना दिया, जिस तरह उनकी सर्वाधिक मुखालफत करने वाले एफआरओए के पूर्व सेक्रेटरी जनरल का उत्पीड़न करने की कोशिश की और अपनी बीवी की जरूरतों के मद्देनजर जिस तरह से उत्तर रेलवे के पूर्व सीएमई सहित दिल्ली मंडल के कई वरिष्ठ मैकेनिकल अधिकारियों को शिफ्ट किया, अब तक घटित इन सब ‘दुर्घटनाओं’ का आगाज ‘रेलवे समाचार’ ने तब ही कर दिया था, जब अरुणेंद्र कुमार अपने आका कमलनाथ के अनैतिक सहयोग से एक साल पहले परमानेंट सीआरबी बनने में कामयाब हुए थे.

सीआरबी और उनकी बीवी के नाम पर थू-थू कर रहे हैं तमाम वरिष्ठ रेल अधिकारी

आज स्थिति यह है कि न सिर्फ रेलवे बोर्ड और सभी जोनों एवं उत्पादन इकाईयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उनके और उनकी बीवी के नाम पर थू-थू कर रहे हैं, बल्कि उनका नाम न उजागर करने की शर्त पर सीआरबी सेल के लोग भी अब अपना सारा संकोच छोड़कर यह कहने लगे हैं कि इससे ज्यादा घटिया और कदाचारी अधिकारी उन्होंने आज तक इस चैम्बर में नहीं देखा था. पहचान गुप्त रखने की शर्त पर सीआरबी सेल में पहले काम कर चुके और हाल ही में सेवानिवृत्त हुए कुछ अधिकारियों की भी यही ओपिनियन है. इसके अलावा कई पूर्व जीएम और पूर्व बोर्ड मेम्बरों ने भी ‘रेलवे समाचार’ से इस बात की पुष्टि की है.

हाल ही में हुई एक मुलाकात में सीआरबी सेल के कुछ लोगों ने बताया कि सीआरबी ने ऐसे करीब 15-20 अधिकारियों के मोबाइल नंबर उन्हें देकर यह पता लगाने को कहा था कि ये नंबर किसके हैं. उन्होंने बताया कि यह नंबर उन अधिकारियों के थे, जिन्होंने एक खास समय के दरम्यान कभी ‘रेलवे समाचार’ से बात की थी. कुरेदने पर उन्होंने इस ‘खास समय’ का खुलासा करते हुए कहा कि यह अरुणेंद्र कुमार के सीआरबी बनने का समय था. उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारियों के यह मोबाइल नंबर उन्होंने या तो खुद निकलवाए होंगे अथवा सीबीआई से लिए होंगे, जिसने जनवरी 2013 से ही लगातार ‘रेलवे समाचार’ का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखा था.

वसूली और बचाव में सहायक रहे द.पू.म.रे. के ‘पांच पांडवों’ को करवाया विदेश भ्रमण

अरुणेंद्र कुमार भले ही प्रशासनिक मामलों में शून्य हों, मगर ‘निजी स्वार्थ प्रबंधन और जोड़तोड़’ में उन्हें महारत हासिल है. उनकी इस महान खूबी के बारे में यह बात ‘रेलवे समाचार’ ने बहुत पहले ही लिखी थी. प्राप्त जानकारी के अनुसार जब वह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर में महाप्रबंधक थे, तब उनके लिए उगाही करने वालों, उनकी मैडम के लिए पीने का माकूल प्रबंध करने वालों, उनकी मैडम द्वारा पीने के बाद की जाने वाली बदसलूकी, बदमिजाजी की बैड-पब्लिसिटी को रोकने और मीडिया प्रबंधन सहित मीडिया को मैनेज करने वालों, उनके बंगले पर दारू और सब्जियां पहुंचाने वालों, मैडम को खरीदारी करवाने वालों और उनके लिए वसूली करने वालों आदि को उन्होंने सीआरबी बनते ही न सिर्फ कई तरह से उपकृत किया है, बल्कि उन्हें विदेशों की सैर करवाई है, और विदेशों में प्रतिनियुक्ति पर भी भेजा है.

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह सभी डायरेक्टर लेवल के अधिकारी हैं, जो कि द.पू.म.रे., बीलपुर में ‘पांच पांडवों’ के नाम से जाने जाते हैं, इन्हें अरुणेंद्र कुमार ने रेलवे के खर्च पर विदेशों की सैर करवाकर अपने पर उनके द्वारा पूर्व में किए गए उपकार का बदला चुकाया है. इनमें से एक पूर्व सीनियर डीईएन/समन्वय/बिलासपुर ए. बी. गुप्ता रहे हैं, जो कि आजकल नागपुर मंडल, द.पू.म.रे. में सीनियर डीईएन/समन्वय के पद पर पदस्थ हैं. इन्हें अरुणेंद्र कुमार ने जुलाई/अगस्त में सरकारी खर्च पर 15 दिन की सैर करने स्विट्ज़रलैंड भेजा था. श्री गुप्ता पर आरोप है कि बिलासपुर में तैनाती के समय वह जीएम के बंगले पर दारू, सब्जियां और मांग के अनुसार मैडम को खरीदारी करवाने के साथ ही साहब के लिए भी मांग के अनुरूप बाकी सारे जरुरी संसाधन जुटाते थे?

द.पू.म.रे. बिलासपुर में एक उप-महाप्रबंधक/सामान्य (डीजीएम/जी) आर. के. अग्रवाल हैं, जो कि मैडम द्वारा पीने के बाद बंगले पर काम करने वाले रेलकर्मियों के साथ की जाने वाली बदसलूकी, बदमिजाजी की बैड-पब्लिसिटी को रोकने और मीडिया प्रबंधन सहित मीडिया को मैनेज करने का महत्वपूर्ण और पुण्य का काम करते थे? इसके अलावा बताते हैं कि वह तत्कालीन जीएम (अरुणेंद्र कुमार) द्वारा की जाने वाली तमाम ट्रांसफर/पोस्टिंग के बदले में उनके लिए संबंधितों से उगाही भी करते थे? परिणामस्वरूप सीआरबी बनने के बाद अरुणेंद्र कुमार ने सरकारी खर्चे पर श्री अग्रवाल को दो देशों रूस और श्रीलंका की सैर करवाई है.

रेलवे ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में रहता है अधिकारी का बंगला प्यून

मंबई मंडल, मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ मंडल अभियंता (सीनियर डीईएन/ईस्ट) का बंगला प्यून पनवेल स्थित ऑफिसर्स रेस्ट हाउस के सूट नंबर-1 में पिछले करीब तीन-चार महीनों से रहकर सारी आलीशान व्यवस्था का आनंद उठा रहा है. दिलीप नाम के इस बंगला प्यून ने खुद इस बात को ‘रेलवे समाचार’ प्रतिनिधि से स्वीकार किया है कि उसे यहां साहब ने रखवाया है. यह पूछने पर कि उसके साहब का नाम क्या है, तो उसने संजय लव्हात्रे बताया है, जो कि मुंबई मंडल में सीनियर डीईएन/ईस्ट हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री लव्हात्रे नवी मुंबई में ही निजी आवास में रहते हैं, जहां बंगला प्यून के रहने हेतु आउट हाउस की कोई व्यवस्था नहीं है. इसीलिए उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत काफी लम्बे समय से अपने बंगला प्यून को ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में रखा हुआ है. इस बात की पुष्टि श्री लव्हात्रे के बंगला प्यून दिलीप ने भी रविवार, 19 अक्टूबर को दोपहर बाद करीब 2 बजे रेलवे समाचार’ प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए की है.

अवास्तविक दरों पर ट्रकों की हायरिंग, जमकर लग रहा है रेलवे रेवेन्यु को चूना

मुंबई मंडल, मध्य रेलवे का कारनामा :

मध्य रेलवे, मुंबई मंडल के कारनामों की तीसरी कड़ी में जो मामला सामने आया है, उसमें दिया गया टेंडर न सिर्फ बोगस प्रतीत हो रहा है, बल्कि इस टेंडर के माध्यम से हायर किए गए ट्रकों के लिए दी गई दरें अवास्तविक हैं. इन दरों पर कोई भी कांट्रेक्टर काम नहीं कर कर सकता है. इसका मतलब यह लगाया जा रहा है कि यह टेंडर सिर्फ संबंधित कांट्रेक्टर को लाभ पहुंचाने और सम्बंधित अधिकारियों द्वारा मोटा कमीशन खाने के लिए ही दिया गया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 मई 2014 को 9 मीट्रिक टन, 4.5 मीट्रिक टन और 1 मीट्रिक टन के तीन ट्रकों को हायर करने का टेंडर (नंबर बीबी/डब्ल्यू/3001/1031/एस/डब्ल्यूआर/आरईवी) किया गया था. यह टेंडर 2,07,98,952 रुपए में दिया गया है. जबकि इसकी ओरिजनल कॉस्ट 30578261.28 रुपए थी. इस टेंडर के लिए दिए गए वर्क ऑर्डर के आइटम नंबर 021450 के अनुसार 9 एमटी ट्रक की प्रतिमाह 2500 किमी. पर ओरिजनल कॉस्ट 8134774.08 रुपए और रेट 84737.23 रुपए था, जिसे निगोशिएशन में क्रमशः 57,40,800 रुपार और 59,800 रुपए पर कांट्रेक्टर ने अपनी सहमति दी है. इसके अलावा 2500 किमी. के बाद प्रति अतिरिक्त किमी. प्रतिमाह (आइटम नंबर 021460) की ओरिजनल कॉस्ट 3,24,960 रुपए और रेट 33.85 रुपए था, जिस पर निगोशिएशन में क्रमशः मात्र 96 रुपए और 0.01 पर सहमति हुई है.

इसी प्रकार वर्क ऑर्डर के आइटम नंबर 021470 के अनुसार 4.5 एमटी ट्रक की प्रतिमाह 2500 किमी. पर ओरिजनल कॉस्ट 8466432.48 रुपए और रेट 58794.67 रुपए था, जिसे निगोशिएशन में क्रमशः 57,60,000 रुपए और 40,000 रुपए पर कांट्रेक्टर ने अपनी सहमति दी. इसके अलावा 2500 किमी. के बाद प्रति अतिरिक्त किमी. प्रतिमाह (आइटम नंबर 021480) की ओरिजनल कॉस्ट 4,28,112 रुपए और रेट 29.73 रुपए था, जिस पर निगोशिएशन में क्रमशः मात्र 144 रुपए और 0.01 पर सहमति हुई है.

व्हाट्स ऐन आईडिया सर जी..!

मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेनों में अब रिमूवेबल स्ट्रेचर का आईडिया काम में लाया गया है. पीक ऑवर में भीड़ के समय लोकल ट्रेनों से गिरकर अथवा ट्रेस पासिंग में घायल हुए यात्रियों को उठाकर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए यह स्ट्रेचर काम आएगा. ऐसा मानकर मध्य रेलवे प्रशासन ने इस नए आईडिए को मूर्तरूप दिया है. यह रिमूवेबल स्ट्रेचर एक खास जगह किसी एक कोच में सीट के रूप में लगा हुआ होगा, जिस पर बैठे यात्रियों को उठाकर और वहां से इसे निकालकर घायल की मदद के लिए ले जाया जाएगा. इससे पहले यह स्ट्रेचर मोटरमैन कैब में और बाद में गार्ड कैब में रखा गया था. जब मोटरमैनों/गार्डों इसे अपनी कैब में रखे जाने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था, तब इसे उनके पीछे के लगेज कम्पार्टमेंट में रखा गया था. रेल प्रशासन की बदकिस्मती से चोरों ने घायलों और मृतकों को ले जाने वाली इस वास्तु को भी चोरी कर लिया. तब इस रिमूवेबल स्ट्रेचर को यात्रियों के बैठने वाली सीट के रूप में इस्तेमाल किए जाने और जरुरत पड़ने पर वहां से निकालकर घायलों या मृतकों के लिए इस्तेमाल ले जाए जाने का आईडिया अमल में लाया गया है.

इसमें कोई शक नहीं है कि यह एक नया आईडिया है, मगर इसके अमल में लाने में जो दिक्कतें या वास्तविक अड़चने हैं, उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके बारे में भी मध्य रेल प्रशासन ने अवश्य विचार किया होगा. मगर एक बात तो निश्चित ही कही जा सकती है कि मध्य रेल प्रशासन का आईडिया बाल मुड़ाकर मुर्दे के हल्का हो जाने की उम्मीद करने जैसा ही है. मतलब यह कि ऐसे अस्थाई और अवास्तविक आईडिए के इस्तेमाल से मुख्य समस्या का समाधान हो जाने की उम्मीद रेल प्रशासन द्वारा की जा रही है, जो कि उचित नहीं है. इसके पीछे रेल प्रशासन की मंशा मुख्य समस्या से लोगों का ध्यान भटकाना भी हो सकता है. इस गैर-वाजिब और अवास्तविक तरीके को दर्शाकर रेल प्रशासन हाई कोर्ट की आँखों में धूल झोंकने का भी प्रयास कर रहा है, जो कि मुंबई में उपनगरीय गाड़ियों की चपेट में आकर रोजाना होने वाली 10-12 मौतों को रोकने का कोई पुख्ता एवं परिणामी इंतजाम किए जाने का दबाव रेल प्रशासन पर बनाए हुए है.

उ.म.रे. को प्रतिष्ठित सिविल, मैकेनिकल एवं स्टोर्स शील्‍ड मिलने पर भारी खुशी

उत्‍तर मध्‍य रेलवे मुख्‍यालय में सभी विभागीय अधिकारियों की समन्‍वय बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने 59वें राष्‍ट्रीय रेल पुरस्‍कार समारोह में उत्‍तर मध्‍य रेलवे को वर्ष 2013-14 की प्रतिष्ठित सिविल इंजीनियरिंग शील्‍ड, मैकेनिकल इंजीनियरिंग शील्‍ड एवं सेल्‍स मैनेजमेन्‍ट शील्‍ड मिलने पर ख़ुशी व्‍यक्‍त की. इस सफलता के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी. इस अवसर पर अपने संबोधन में महाप्रबंधक ने विशेष तौर पर उत्‍तर मध्‍य रेलवे के सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा भंडार विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की तथा आगे भी इस प्रदर्शन को बनाये रखने की बात कही.

59वें राष्‍ट्रीय रेल पुरस्‍कार समारोह में उत्‍तर मध्‍य रेलवे को प्राप्त हुई प्रतिष्ठित सिविल इंजीनियरिंग शील्‍ड, मैकेनिकल इंजीनियरिंग शील्‍ड एवं सेल्‍स मैनेजमेन्‍ट शील्‍ड के साथ महाप्रबंधक प्रदीप कुमार एवं उनके सभी विभाग प्रमुख.

प्रदीप कुमार ने कहा कि उत्‍तर मध्‍य रेलवे की वर्ष 2003 में स्‍थापना के बाद यह पहला अवसर है कि जब उत्‍तर मध्‍य रेलवे को सभी रेलों के मध्‍य सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं सेल्‍स मैंनेजमेंट क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह पुरस्‍कार प्राप्‍त करने का गौरव हासिल हुआ. यह शील्‍ड भारतीय रेल की क्षेत्रीय रेलों में सर्वोत्‍तम प्रदर्शन करने वाली क्षेत्रीय रेल को उसके योगदान के लिए प्रदान की जाती है. महाप्रबंधक ने संबंधित विभागों को विभिन्‍न परियोजनाओं के सफलतापूर्वक क्रियान्‍वयन और रेल संरक्षा की दिशा में किए गए सतत प्रयासों के लिए बधाई का पात्र बताया.

महाप्रबंधक ने जारी किया पूर्व रेलवे का समेकित आपदा प्रबंधन कार्यक्रम

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक आर. के. गुप्ता ने मंगलवार, 14 अक्टूबर को यहां मुख्यालय फेयरली प्लेस में पूर्व रेलवे का समेकित आपदा प्रबंधन कार्यक्रम जारी किया. इस अवसर पर उनके साथ अपर महाप्रबंधक एवं मुख्य संरक्षा अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे. यह सम्पूर्ण आपदा प्रबंधन कार्यक्रम एक पुस्तक और सीडी के रूप में है. इस आपदा प्रबंधन कार्यक्रम पुस्तक में बाढ़, भूकंप, समुद्री तूफान आदि विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं एवं दुर्घटनाओं से निपटने के सभी तौर-तरीके बताए गए हैं.

मुख्यालय फेयरली प्लेस में पूर्व रेलवे का समेकित आपदा प्रबंधन कार्यक्रम जारी करते हुए महाप्रबंधक श्री आर. के. गुप्ता. इस अवसर पर उनके साथ अपर महाप्रबंधक एवं मुख्य संरक्षा अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे.

इस पुस्तक के सभी प्रावधानों का पालन पूर्व रेलवे के सभी मंडलों द्वारा किया जाएगा. इसके साथ ही इस पुस्तक में जों के अंतर्गत एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेनों (एआरटी), क्रेन एवं मेडिकल वैनों, विभिन्न आपदा प्रबंधन अधिकारियों की लोकेशन और उनके संपर्क नंबर, फायर ब्रिगेड, हॉस्पिटल, सेना और हेलिपैड की लोकेशन आदि की विस्तृत जानकारी दी गई है.

श्रीमती राजलक्ष्मी रविकुमार बनीं फाइनेंस कमिश्नर/रेलवेज

श्रीमती राजलक्ष्मी रविकुमार को भारतीय रेल का नया फाइनेंस कमिश्नर बनाया गया है. उन्होंने मंगलवार, 14 अक्टूबर से अपना कार्यभार संभाल लिया है. इससे पहले वह भारतीय रेल की राष्ट्रीय अकादमी, वड़ोदरा की महानिदेशक थीं. 1977 बैच की इंडियन रेलवे एकाउंट्स सर्विस अधिकारी श्रीमती रविकुमार ने एफए एंड सीएओ एवं डायरेक्टर फाइनेंस, कोंकण रेलवे, एफए एंड सीएओ, आईसीएफ़, एफए एंड सीएओ, मध्य रेलवे और मंडल रेल प्रबंधक, सोलापुर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. इसके अलावा उन्होंने विदेशों में भी कई स्तर का प्रबंधकीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है. बतौर डीआरएम, सोलापुर उनके कार्यकाल में सोलापुर मंडल को ओवरआल इंटर डिवीजनल एफिशिएंसी शील्ड मिली थी, जबकि बतौर एफए एंड सीएओ, वित्त प्रबंधन में बेहतर कार्य-निष्पादन के लिए मध्य रेलवे को रेलमंत्री से फाइनेंस शील्ड प्राप्त हुई थी. श्रीमती रविकुमार को नाटक और संगीत में भी गहरी रुचि है.

किस-किस को प्रतिबंधित करेंगे अरुणेंद्र कुमार?

कांताबाई की मुफ्तखोरी के कारण हो रही है पूरी भारतीय रेल की बदनामी

देश की इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया ने दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे के पूर्व सीनियर डीएमई अजय सिंह द्वारा लिखी गई पांच पेज की चिट्ठी को लेकर एक बार फिर चेयरमैन, रेलवे बोर्ड अरुणेंद्र कुमार की बुरी तरह से छीछालेदर की है. इस बार भी वह अपनी बीवी की ही बदौलत बहुत बुरी तरह और वास्तविक रूप से एक्सपोज हुए हैं. इस बार उनके पास कोई तथ्यात्मक बहाना नहीं था कि अपना बचाव कर पाते. और जिस बचकाने तरह से उन्होंने अपना यह बचाव करने की कोशिश की, उससे वह और भी ज्यादा नंगे हो गए. उल्लेखनीय है कि दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे के सीनियर डीएमई/समन्वय अजय सिंह को सिर्फ इसलिए उनके पद से हटा दिया गया, क्योंकि उन्होंने ‘मैडम’ के कहने पर सीआरबी के बंगले पर टॉयलेट पेपर नहीं पहुंचाया था. यही नहीं, इस ‘महान काम में चूक’ के लिए उनके खिलाफ ‘सेवा में कमी’ की प्रतिकूल टिप्पणी भी उनके सर्विस रिकॉर्ड में की गई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार मैडम के इस महान काम में चूक के लिए जिम्मेदार ठहराकर सबसे पहले अजय सिंह को राइट्स के पांच हफ्ते की एक फर्जी ट्रेनिंग के लिए 25 अगस्त को नामांकित करके उन्हें पद से शिफ्ट कर दिया गया और इधर उनकी जगह 12 सितंबर को एस. एस. अहलुवालिया को पदस्थ कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनचाहे अधिकारी को पद से हटाने के लिए उच्च रेल अधिकारियों द्वारा इसी तरह की तरकीब वर्षों से रेलवे में अपनाई जा रही है, जिससे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बुरी तरह से हतोत्साहित होते रहे हैं. इसी तरह इससे पहले पूर्व सीएमई अश्वनी लोहानी सहित दिल्ली मंडल के कई मैकेनिकल एवं अन्य अधिकारियों को हटाया गया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 9 अगस्त को सीआरबी के बंगले में साईं नामक ‘बंधुआ मजदूर’ ने फ़ोन करके अजय सिंह को सूचित किया कि ‘साहब’ के बच्चे आए हैं, बंगले में टॉयलेट पेपर खत्म हो गया है, इसलिए बंगले पर टॉयलेट पेपर फौरन पहुंचाया जाए. सिंह ने साईं को तुरंत यह कहकर मनाकर दिया कि यह उनका काम नहीं है और मंडल से टॉयलेट पेपर सीआरबी के बंगले पर नहीं भेजा जाएगा. इसके करीब 10 मिनट बाद ही सीआरबी की पत्नी कांताबाई ने उन्हें फ़ोन करके पूछा कि आखिर वह टॉयलेट पेपर क्यों नहीं भेज रहे हैं? उन्होंने टॉयलेट पेपर भेजे जाने से मना क्यों किया? कांताबाई के स्वर में सीआरबी की बीवी होने का घमंड तो था ही, वह बॉस की बीवी होने के नाते पूरे अधिकार से और हड़क भरे स्वर में बात कर रही थीं. जब सिंह ने उन्हें भी टॉयलेट पेपर भेजे जाने में असमर्थता जताते हुए मना कर दिया, तो उन्होंने कहा कि वे उनकी शिकायत सीएमई से करेंगी, तब झक मारकर उन्हें टॉयलेट पेपर भेजना पड़ेगा.

ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ रेल अधिकारियों के बीच प्रमोशन एवं पोस्टों को लेकर बहस

एक सेवानिवृत्त महाप्रबंधक द्वारा फेडरेशन ऑफ़ रेलवे ऑफिसर्स एसोसिएशन (एफआरओए) के फेसबुक पेज पर ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ अधिकारियों के प्रमोशन और पोस्टों में आ रही विसंगति और ग्रुप ‘बी’ को पांच साल की एंटी-डेटिंग का लाभ दिए जाने से पिछड़ते जा रहे ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों की कैरिएर प्लानिंग को लेकर किए गए विस्तृत विश्लेषण पर ग्रुप ‘ए’ के तमाम अधिकारियों ने अपने विचार (कमेंट्स) व्यक्त किए हैं, जबकि इस बहस में ग्रुप ‘बी’ अधिकारी काफी पिछड़ गए हैं. इंडियन रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेरेशन (आईआरपीओएफ) के पूर्व अध्यक्ष पी. वी. सुब्बाराव और सुशील कुमार बंसल एवं उत्तर मध्य रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री एस. एस. पाराशर सहित बिरेन्द्र पाल सिंह, हरि सिंह, होतम सिंह और सुरेंदर सिंह के अलावा अन्य किसी प्रमोटी या ग्रुप ‘बी’ अधिकारी ने इस फोरम में अपने विचार व्यक्त करना जरुरी नहीं समझा है.

इसके अलावा आईआरपीओएफ के तथाकथित सर्वज्ञाता ‘एडवाइजर’ और प्रमोटी अधिकारियों को अब तक मिली तमाम सुविधाओं, खासतौर पर 411 पोस्टों और एंटी-डेटिंग, का सारा क्रेडिट लेने वाले जीतेन्द्र सिंह का भी इस बहस में कहीं कोई अता-पता नहीं है, जबकि जोनों और उत्पादन इकाईयों के खर्चे पर उनकी एजीएम/ईसीएम में वर्तमान पदाधिकारियों के बजाय खुद उनके मंच पर शान से बैठने में उन्हें कोई शर्म महसूस नहीं होती है. इसके साथ आईआरपीओएफ के किसी वर्तमान पदाधिकारी ने भी इस बहस में भाग नहीं लिया है. जबकि इसके वर्तमान महामंत्री खुद पर्सनल विभाग से हैं और उन्हें कैडर या ग्रुप की प्लानिंग की भी बेहतर जानकारी है. इसके बावजूद उनका कोई भी विचार इस बहस में सामने नहीं आया है. जहां तक इसके वर्तमान अध्यक्ष की बात है, तो उनके बारे में कुछ न ही कहा जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि वह इस फेडरेशन पर जीतेन्द्र सिंह द्वारा लादे गए हैं, बाकी उनकी न तो अपनी कोई पहचान या पकड़ है, न ही कैडर/ग्रुप के बारे में उनकी कोई समझ है, और न उन्हें इन तमाम तकनीकी पहलुओं से कोई लेना-देना ही है.

ग्रुप ‘बी’ के जिन अधिकारियों ने यहां अपने विचार व्यक्त किए हैं, वह भी ज्यादा कुछ विस्तार में नहीं जा पाए हैं. सुरेंद्र सिंह ने रेलवे को भी आईएएस के हाथों सुपुर्द करने की बात कही है, जिसका पुरजोर समर्थन हरि सिंह ने भी किया है और होतम सिंह ने भी लगभग यही बात कही है. जबकि श्री सुब्बाराव ने सीधे-सीधे रेलवे को आईएएस को सौंप दिए जाने की बात कही है. यही नहीं उन्होंने इसके लिए कुछ तर्क भी दिए हैं. श्री पाराशर ने आईआरपीओएफ से रेलवे को आईएएस को सौंपे जाने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की बात कही है. जबकि श्री बंसल ने इस बहस में आईआरपीओएफ के किसी भी पदाधिकारी सहित तमाम ग्रुप ‘बी’ अधिकारियों के भाग ने लेने पर चिंता जाहिर की है और उनका आह्वान करते हुए कहा है कि यदि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तो भविष्य में उनका कोई रखवाला नहीं है. श्री बंसल ने इसकी जिम्मेदारी श्री पाराशर पर डाली है कि वह इस मामले को प्रॉपर तरीके से उठाएं.

एडीजी/पीआर द्वारा रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का घोर लापरवाह तरीका

दिल्ली में 8 सितंबर 2014 को प्रेस को संबोधित करते हुए रेलमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा. उनके साथ हैं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और चेयरमैन, रेलवे बोर्ड अरुणेन्द्र कुमार. 17 सितंबर को रेलवे बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड की गई इस फोटो के परिचय के साथ कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि रेलमंत्री और रेल राज्यमंत्री किस विषय पर प्रेस को संबोधित कर रहे थे? हमेशा सीआरबी के आगे-पीछे घूमने वाले एडीजी/पीआर/रे.बो. ए. के. सक्सेना और उनके स्टाफ द्वारा की जाने वाली रेलमंत्री एवं रेल राज्यमंत्री की पब्लिसिटी का यह है घोर लापरवाह तरीका !!

रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने की द.पू.रे. और मेट्रो रेलवे की कार्य-निष्पादन समीक्षा

दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय, गार्डन रीच, कोलकाता में हाल ही में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने दक्षिण पूर्व रेलवे और मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक राधेश्याम के साथ कार्य-निष्पादन समीक्षा बैठक की. इस अवसर पर दक्षिण पूर्व रेलवे और मेट्रो रेलवे के सभी विभाग प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे. बैठक में दक्षिण पूर्व रेलवे एवं मेट्रो के महाप्रबंधक राधेश्याम से चर्चा करते हुए रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा.

‘रेलवे समाचार’ के खिलाफ रेलवे बोर्ड के तीन असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी फतवे

सुरेश त्रिपाठी

रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) ने ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ और इसके संपादक के खिलाफ सीबीआई की संस्तुति और रेलवे बोर्ड विजिलेंस की सलाह पर (ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 21.08.2014, ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 27.08.2014 और ई(ओ)III-2014/पीएल/07, दि. 3.9.2014) तीन असंवैधानिक, गैर-क़ानूनी एवं मानहानिकारक आदेश सभी जोनल महाप्रबंधकों को जारी किए हैं. पहले आदेश में संपादक को एक ‘अवांछित’ व्यक्ति करार देते हुए कहा गया है कि उससे कोई भी रेल अधिकारी कोई संबंध न रखे, जबकि दूसरे आदेश में सभी जोनल मुख्य जनसंपर्क अधिकारियों को कहा गया है कि ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ को कोई विज्ञापन न दिए जाएं. तीसरे आदेश में पहले आदेश को और विस्तारित करते हुए रेलवे के सभी रेलकर्मियों को यह आदेश दिया गया है कि वे ‘परिपूर्ण रेलवे समाचार’ और इसके संपादक से किसी प्रकार का कोई संबंध न रखें.

वर्ष 1997 से प्रकाशित ‘रेलवे समाचार’ ने खासतौर पर भारतीय रेल की तमाम गतिविधियों पर अपना फोकस रखा है. इसके किसी भी प्रतिनिधि ने आजतक रेलवे से किसी भी प्रकार की कोई सरकारी सुविधा का कोई लाभ नहीं लिया है. यदि आपातकालीन कोटा लिया गया है, तो यह हमारा अधिकार है. जहां तक विज्ञापन की बात है, तो डीएवीपी नहीं होने से यह वैसे भी नहीं दिए जाते हैं. ऐसे में उपरोक्त तीन-तीन फतवे जारी करने की आखिर रेलवे बोर्ड को क्या जरुरत आन पड़ी थी? इसका एकमात्र कारण यही हो सकता है कि ‘रेलवे समाचार’ रेलवे बोर्ड और जोनल स्तर के कई वरिष्ठ रेल अधिकारियों के भ्रष्टाचार और जोड़तोड़ को पुरजोर तरीके से उजागर करता रहा है. रेलवे बोर्ड स्तर पर होने वाली नीतिगत जोड़तोड़, उच्च पदों की पदस्थापना में होने वाले भ्रष्टाचार और जोड़तोड़ तथा नीतियों को तोड़ने-मरोड़ने आदि को उजागर किए जाने से रेलवे की नौकरशाही की एक खास लॉबी इससे बुरी तरह बौखलाई हुई है.

नौकरशाही के ‘संगठित गिरोह’ से लड़ने की अब कौन करेगा हिमाकत !

सुरेश त्रिपाठी

देश के प्रशासनिक तंत्र में कुछ ऐसे पद होते हैं, जिनकी प्रतिष्ठा या गरिमा को कायम रखने और उनकी जिम्मेदारी निभाने के लिए यह जरुरी होता है कि उनकी अहमियत को समझा जाए. उन पर बैठकर जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को परखा जाए. पद की प्रतिष्ठा को बनाए रखा जाए और उसकी इज्जत की जाए तथा उसकी गरिमा को सर्वोपरि माना जाए. मगर अफसोस कि ऐसा नहीं हो रहा है. यह अत्यंत शर्मनाक बात है. सीबीआई चीफ का पद भी एक ऐसा ही महत्वपूर्ण पद है. भ्रष्टाचार को रोकने और जांचने सहित देश भर के लगभग सभी गलत कार्यों तथा देश की सुरक्षा से सम्बंधित तमाम मामलों की जांच करने के लिए बनी यह जांच एजेंसी पुलिस एवं सभी सरकारी महकमों की जांच करती है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से जैसी खबरें आ रही हैं, उनसे इस प्रतिष्ठित और पावरफुल पद की गरिमा लगभग तार-तार हो गई है. पूरा देश इस मामले को अपनी सांसें थामकर देख रहा है. देश की सर्वोच्च अदालत सीबीआई चीफ को लगातार घेरती जा रही है. यह सब देखते हुए सर्व-सामान्य आदमी अपना सिर धुन रहा है कि आखिर चारित्रिक गिरावट का यह क्रम कहां जाकर थमेगा?

ऐसा ही एक पद सीएजी का भी है. इस पर विराजमान रहे विनोद राय ने 2जी और कोयला खान आवंटन में हुए नुकसान को 1.76 लाख करोड़ रुपए का बताकर यूपीए सरकार को उखाड़ फेंकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. इस कथित नुकसान से फैले भ्रम के कारण इससे लाभान्वित हुए लोगों में खुशियां मनाई जा रही हैं, जबकि इसे लेकर हर ऐरा-गैर कोई भी अनाप-शनाप बयान देकर राजनीति के गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है. सीबीआई चीफ अपने बचाव में चाहे जितनी दलीलें दें, लेकिन यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है कि अरबों रुपए के घोटाले के आरोपियों को कार्यालय समय के बाद वह अपने सरकारी आवास में बुलाकर 15 महीनों में 50 बार मिलें? 2जी घोटाले में आरोपी जिस रिलायंस टेलीकॉम की जांच सीबीआई कर रही है, उसके अधिकारी उनसे उनके घर पर 27 बार मिलें? सर्वाधिक विवादास्पद मांस व्यापारी मोईन कुरैशी और उसके कुछ सहयोगी पिछले 15 महीनों में सीबीआई चीफ से उनके घर पर कुल 90 बार मिले? यह सूची बहुत लंबी है. क्या यह अनैतिक और अस्वाभाविक मेलजोल ‘कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ की श्रेणी में नहीं माना जाना चाहिए?

रेल परिचालन बहुत जिम्मेदारी और सतर्कता का काम है –मुकेश निगम

सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन ने धूमधाम से मनाया इंजीनियर्स डे

सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (सीआरईए) भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन के अवसर पर हर साल की तरह इस साल भी 15 सितंबर को सीएसटी ऑडिटोरियम, मुंबई में बड़ी धूमधाम से ‘इंजीनियर्स डे’ मनाया. इस अवसर पर ‘सेफ्टी एंड रिलायबिलिटी ऑन ट्रेन ऑपरेशन’ विषय पर सेफ्टी सेमिनार का भी आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन मुंबई मंडल, मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक मुकेश निगम ने किया. उनके साथ एडीआरएम संजीव देशपांडे और ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईआरईएफ) के मुख्य सलाहकार इंजी. ए. एस. तिवारी, संगठन मंत्री इंजी. मनोज पांडेय और सीआरईए के मंडल अध्यक्ष इंजी. डी. पी. सिंह एवं मंडल मंत्री इंजी. जे. के. सिंह और वरिष्ठ सदस्य इंजी. टी. के. मारगाये ने भी दीप-प्रज्वलन किया.

सेफ्टी सेमिनार के विषय पर अपने विचार रखते हुए एआईआरईएफ के मुख्य सलाहकार इंजी. ए. एस. तिवारी ने कहा कि आपदा प्रबंधन समिति ने आरडीएसओ से कहा था कि सभी अपर क्लास कोचों में आपातकालीन लाइट लगाई जाए. रेल प्रशासन ने बिना सोचे-समझे और इस संस्तुति का बिना कोई व्यावहारिक अध्ययन किए ही इस पर अमल कर दिया. नतीजा यह है कि अब तक करीब 75 प्रतिशत कोचों में यह आपातकालीन लाइटें लग चुकी हैं, मगर इनका कोई उपयोग नहीं है. इसकी परफोर्मेंस भी अच्छी नहीं आई है. यह चोरी हो रही हैं, या ख़राब हो रही हैं, तो इन्हें जल्दी रिप्लेस भी नहीं किया जा रहा है. ऐसे में इनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि उनका यह मानना है कि जो 25 प्रतिशत कोच बचे हैं, उनमें इन्हें न लगाकर उसी खर्च से आवश्यक नट-बोल्ट, जॉली, स्प्रिंग्स आदि स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति की जाए. महिला चपरासी न रखे जाने का मुद्दा उन्होंने फिर से उठाया. इसके अलावा रेल दुर्घटनाएं क्यों होती हैं, इसके लिए उन्होंने स्पेयर पार्ट्स की ख़राब गुणवत्ता और निरीक्षण की कमी को जिम्मेदार ठहराया.

यूनियन की मनमानी के खिलाफ सभी अधिकारी एकजुट

जबलपुर - कटनी सेक्शन की सिरोहा रेलवे क्रासिंग का गेट बंद होने पर भी उसका सिग्नल ग्रीन रहने की बार-बार मिल रही शिकायतों के कारण सीनियर डीएसटीई/समन्वय/जबलपुर गौरव सिंह ने जब वहां जाकर देखा तो पाया कि उन्होंने जिस जेई और तकनीशियन को उक्त गेट का निरीक्षण करने भेजा था, वह वहां कभी गए ही नहीं थे. इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जब उन्होंने उक्त दोनों कर्मचारियों को डांट लगाई, तो उन्होंने इसे मारपीट का रूप देकर यूनियन का मुद्दा बना दिया. यह घटना 2 सितंबर की है. यूनियन ने गौरव सिंह के निलंबन की मांग पर यहां एक दिन की काम बंद हड़ताल भी कर दी.

यही नहीं, यूनियन ने सम्बंधित कर्मचारियों से सिंह के खिलाफ मारपीट करने और धमकाने की एफआईआर भी 5 सितंबर को पुलिस में दर्ज करवा दी. यात्रियों की संरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले उक्त दोनों कर्मचारियों को यूनियन का सरक्षण प्राप्त होने से प्रशासन भी दबाव में आ गया और उसने किसी प्रकार की औद्योगिक अशांति से बचने के लिए गौरव सिंह को 45 दिन की छुट्टी पर भेज दिया है. यूनियन की इस मनमानी के खिलाफ फेडरेशन ऑफ़ रलवे ऑफिसर्स एसोसिएशन (एफआरओए) से सम्बद्ध पश्चिम मध्य रेलवे ऑफिसर्स एसोसिएशन और पश्चिम मध्य रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स एसोसिएशन से जुड़े सभी अधिकारी भी एकजुट हो गए हैं. उन्होंने बैठक कर सिंह के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित करके प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि यूनियन की मांग को मानते हुए प्रशासन द्वारा गौरव सिंह को अनावश्यक रूप से निलंबित किया जाता है, तो सभी अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे.

एआईआरएफ का एफडीआई के खिलाफ विरोध दिवस

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) ने रेलवे में विदेश पूंजी निवेश (एफडीआई) के खिलाफ 19 सितंबर को सम्पूर्ण भारतीय रेल के सभी जोनों और मंडल मुख्यालयों पर जोरदार विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया है. इसके लिए एआईआरएफ ने ‘रेल बचाओ – देश बचाओ’ का आकर्षक नारा भी दिया है. रेल बजट के तुरंत बाद 14 जुलाई को रेलमंत्री सदानंद गौड़ा को लिखे गए अपने पत्र में एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा था कि जहां भारतीय रेल को अब तक किसी भी तरह के एफडीआई से बाहर रखा गया था, वहीं अब केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में शत-प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है. पत्र में यह भी कहा गया था कि रेल मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पालिसी एंड प्रमोशन को भेजे गए अपने नोट में साफ कहा है कि रेलवे के बुनियादी और ढांचागत विकास के लिए निर्माण, परिचालन और परिवहन आदि में सरकार ने सर्वसम्मति से शत-प्रतिशत निजी/घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश को मंजूरी दे दी है.


अपने पत्र में एआईआरएफ के महामंत्री ने यह भी कहा है की सरकार के इस निर्णय से रेलवे के करीब 13.30 लाख रेलकर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. इसलिए किसी प्रकार की औद्योगिक अशांति फैलने से पहले यह जरुरी है कि रेलवे की सभी मान्यताप्राप्त फेडरेशनों के साथ बैठक करके इस विषय पर गंभीर चर्चा की जाए और इसका कोई सर्वमान्य हाल निकाला जाए. परंतु इस संबंध में रेल मंत्रालय अथवा रेलमंत्री के स्तर पर अब तक कोई पहल नहीं किए जाने से नाराज एआईआरएफ ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का निर्णय लिया है.

आरपीएसएफ कमान्डेंट को रिश्वत लेते सीबीआई ने रंगेहाथ धरा

धनबाद : रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (आरपीएसएफ) की 10वीं बटालियन के कमान्डेंट एस. पी. वशिष्ठ को आरपीएसएफ के दो जवानों से 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रविवार, 14 सितंबर को सीबीआई ने रंगेहाथ धर दबोचा. प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री वशिष्ठ अपने घर पर रविवार की शाम को करीब 6 बजे दोनों जवानों से 10-10 हजार रुपए लेते पकडे गए हैं. इसकी सूचना इन दोनों जवानों ने ही सीबीआई को दी थी.

बताते हैं कि पहले से तय समय के मुताबिक कांस्टेबल मुकेश कुमार और प्रदीप कुमार कायल उक्त राशि देने के लिए कमान्डेंट के आवास पर गए थे. दोनों ने जैसे ही रकम दी, तभी इशारा पाते ही आस-पास ही मौजूद सीबीआई टीम के सदस्यों ने कमान्डेंट को दबोच लिया. कमान्डेंट की गिरफ़्तारी के बाद उनसे पूछताछ के लिए सीबीआई एसपी पी. के. माजी भी मौके पर पहुंचे थे. श्री माजी ने पत्रकारों को बताया कि श्री वशिष्ठ को आरपीएसएफ के दो जवानों से 10-10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है, उनसे पूछताछ के साथ ही उनके घर और कार्यालय की तलाशी ली जा रही है.

2 अक्टूबर को की जाएगी रेलवे द्वारा सफाई अभियान की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के आदेश पर सम्पूर्ण भारतीय रेल में गांधी जयंती, 2 अक्टूबर से सभी रेलवे स्टेशनों और रेलवे कालोनियों में सफाई अभियान की शुरुआत होने जा रही है. इस अभियान में रेलवे के गैंगमैन से लेकर महाप्रबंधक तक के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करते नजर आएंगे. भुसावल मंडल में इस सफाई अभियान की अगुआई मंडल रेल प्रबंधक महेश कुमार गुप्ता करेंगे. यह जानकारी श्री गुप्ता ने यहाँ पत्रकारों को संबोधित करते हुए दी.

पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए भुसावल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक महेश कुमार गुप्ता. उनके साथ हैं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एन. जी. बोरीकर एवं अन्य अधिकारीगण.

हालांकि इस अवसर पर श्री गुप्ता ने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा नियमित रूप से सफाई व्यवस्था की जाती है. परंतु रेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों पर भारी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण कूड़ा-कचरा और गंदगी कुछ ज्यादा ही हो जाती है. तथापि रेल प्रशासन इस पर लगातार नजर रखता है, जिससे इस कारण किसी भी यात्री को आजतक रेल परिसर में कभी कोई बीमारी का सामना नहीं करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि रेल परिसर में गंदगी फैलाने वाले लोगों पर कार्यवाही तो की जाती है, मगर यह कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से शुरू हो रहे सफाई अभियान में गैर सरकारी संगठनों, शैक्षिक संस्थाओं, नेशनल कैडेट कोर और स्काउट एंड गॉइड की मदद से जन-जागृति भी की जाएगी.

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