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Suresh Tripathi, Editor, 105, Doctor House, 1st Floor, Raheja Complex, Kalyan (West) - 421301. Distt. Thane (Maharashtra). Contact:+919869256875 Email : editor@railsamachar.com, railwaysamachar@gmail.com

मनचाही पोस्टिंग पाने वाले अधिकारी क्या रेलमंत्री की इच्छानुरूप परिणाम दे पाएंगे?    ||    रेलवे में फिजूल खर्ची रोकने और वास्तविक सुधार किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव    ||    आरपीएफ के उच्च पदों पर हुई अदला-बदली    ||    पपिया लाहिड़ी के जाने से कटा द.पू.रे. के अधिकारियों/कर्मचारियों का पाप    ||    तीव्र ढ़ांचागत विकास हेतु सभी संभावित स्रोतों से निवेश लाने की जरुरत है -सुरेश प्रभु    ||    रेलवे में समाप्त होनी चाहिए अंग्रेजों की बंगला प्यून की कुप्रथा    ||    रेल परिसर में राजीव गांधी के नाम पर कथित मेले के आयोजन से करोड़ों का घोटाला    ||    फिरोजपुर मंडल, उत्तर रेलवे के पांच अधिकारियों के घरों पर सीबीआई का छापा    ||    रेलवे में एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं !    ||    मध्य रेलवे को लगी मानवीय पनौती    ||    रेलवे बोर्ड को अपना आदेश लागू करवाने की कोई चिंता नहीं !    ||    हावड़ा-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस में एसडीजीएम/सीवीओ/द.पू.म.रे. की अवैध यात्रा?    ||    ‘सीट्रैम’ का वार्षिक समारोह 19 जनवरी को सिकंदराबाद में    ||    रेल की सुरक्षा पर रेल मंत्रालय की जो भी संस्तुति होगी, गृह मंत्रालय उसको अक्षरशः स्वीकार करेगा -राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री    ||    यात्री सुविधा के कार्यों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए -राजीव मिश्र    ||    क्या भारतीय रेल अरुणेंद्र कुमार और उनकी बीवी की जागीर है?    ||    मेंबर ट्रैफिक किसको बनाया जाए, इस पर अभी-भी पेंच कायम    ||    हेमंत कुमार को रेलवे बोर्ड का नया मेंबर मैकेनिकल बनाया गया    ||    आईआरसीटीसी ने जारी किया अपना ऑफिशियल ऐप    ||    उत्तर रेलवे पर क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक संपन्न

अब मुरादाबाद मंडल के सभी वाणिज्य कार्यालय हुए लाइव
अब इसी पारदर्शिता के चलते मुरादाबाद मंडल के उक्त 14 वाणिज्य कार्य-स्थलों से भी सभी प्रकार की जन-शिकायतें ख़त्म हो जाने की उम्मीद सीनियर डीसीएम श्री मनोज शर्मा ने 'रेलवे समाचार' से बात करते हुए व्यक्त की है. श्री शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी लगने से पहले उनके पीआरएस में हर महीने करीब 10 से 15 विजिलेंस मामले दर्ज हो जाते थे, जबकि पब्लिक कम्प्लेंट्स की तो कोई गणना ही नहीं थी. मगर अब न सिर्फ हमारा स्टाफ इस सीसीटीवी के लगने से निडर हुआ है, बल्कि उसमें ईमानदारी से काम करने का साहस भी पैदा हुआ है. उन्होंने बताया कि पहले स्टाफ के मन भी डर रहता था, कि उसकी बात उसके अधिकारीगण ही नहीं सुनेंगे, मगर अब सीसीटीवी के रहते उन्हें कुछ कहने की जरुरत ही नहीं रह गई है, क्योंकि हम अब खुद ही हर वक्त उनकी और उनके कामकाज की निगरानी करते रहते हैं. श्री शर्मा का कहना था कि यही वजह है कि हमने खुद को और खुद के कार्यालय को भी सीसीटीवी की जद में ला दिया है, क्योंकि हमारा मानना है कि स्टाफ के मन में यह आशंका पैदा नहीं होनी चाहिए कि जब कर्मचारी सीसीटीवी के दायरे में काम कर रहे हैं, तो अधिकारियों को भी ऐसा ही क्यों नहीं करना चाहिए.
 
श्री शर्मा का कहना और मानना भी है कि सिर्फ दंड विधान के प्रावधान से खुराफातियों, तिकड़मबाजों, असामाजिक तत्वों, अपराधियों आदि को सुधारा नहीं जा सकता है, बल्कि यदि उन पर और उनकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी जाए, और इस निगरानी की पारदर्शिता भी सुनिश्चित कर दी जाए, तो निश्चित तौर पर उनकी कु-प्रवत्तियों पर अंकुश लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सुधार की प्रक्रिया और आदमी को स्वतः सुधरने का मौका दिए जाने से बेहतर अन्य कोई विकल्प कारगर नहीं हो सकता है. उनका मानना है कि दंड देकर व्यवस्था को सुधारने का कांसेप्ट ही गलत है. आदमी मूलतः ईमानदार है, उसे उसकी संगति और आसपास का परिवेश बुरा बनाता है अथवा बनने के लिए मजबूर करता है. उन्होंने कहा कि जब आरटीआई का प्रावधान आया, तो लोगों को एक उम्मीद हुई थी कि इससे सरकारी संस्थाओं पर जनता द्वारा एक अंकुश लगेगा, मगर अब 8-9 साल के भीतर ही यह देखने को मिल रहा है कि एक तरफ इस प्रावधान ने जहां इसका दुरुपयोग बढ़ाया है और बहुत सारे ब्लैकमेलर पैदा किए हैं, वहीँ दूसरी तरफ सरकारी संस्थाओं के बाबुओं ने इससे बचने और जानकारी छिपाने/नहीं देने के भी कई कारगर तरीके खोज लिए हैं.
 
उन्होंने कहा कि इस तरह से आरटीआई के एक पर्याप्त पारदर्शी प्रयोग/प्रावधान को कुंद कर दिया गया है, जिससे इस प्रावधान की बदनामी भी हो रही है. इसलिए उनका मानना है कि पारदर्शितापूर्ण निगरानी व्यवस्था ही समाज और शासन व्यवस्था से भ्रष्टाचार, अनाचार और कदाचार को रोकने में पर्याप्त रूप से सही साबित हो सकती है. उनकी सीसीटीवी व्यवस्था ने आम आदमी यानि यात्रियों और हमारे कर्मचारियों को भी स्वतः सुधरने के लिए मजबूर किया है. यही वजह है कि जन-शिकायतों के साथ ही विभागीय कदाचार के मामले भी नगण्य हो गए हैं. यही नहीं, अब स्टाफ अपनी जगह से अकारण गायब नहीं होता है, अपनी प्रॉपर ड्यूटी करता है, जिससे उसकी उत्पादकता बढ़ी है. काम ज्यादा होने लगा है. कई-कई महीनों तक लंबित रहने वाली फाइल्स अब न सिर्फ कुछ दिनों में निपटने लगी हैं, बल्कि ज्यादा फाइलें निकलने लगी हैं.
 
'रेलवे समाचार' का मानना है कि मुरादाबाद मंडल की इस पारदर्शी प्रणाली को पूरी भारतीय रेल में अपनाया जाना चाहिए और यदि रेलवे से भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करना है, तो सभी अधिकारियों के चैम्बर्स में सीसीटीवी कैमरे अविलम्ब लगाए जाने चाहिए और उनकी समस्त कार्यालयीन गतिविधियों को मॉनिटर किया जाना चाहिए.

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